
छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा आयुक्तों के बार-बार बदलने का मुद्दा फिर सुर्खियों में है। पिछले दो साल में छह आयुक्तों को हटाया जा चुका है। कई अधिकारी चार से पांच महीने के भीतर ही पद से हटा दिए गए, जिससे स्वास्थ्य विभाग के कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हाल में शिखा राजपूत तिवारी का तबादला भी इसी कड़ी का हिस्सा बना। उन्हें अप्रैल 2025 में जिम्मेदारी मिली थी, लेकिन सात महीने बाद पद बदल दिया गया। इस पूरे मामले पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
दो साल में छह आयुक्त बदले
राज्य में 2023 से लगातार चिकित्सा शिक्षा आयुक्तों में बदलाव देखा गया। नम्रता गांधी को जनवरी 2023 में आयुक्त नियुक्त किया गया था, लेकिन चार महीने बाद ही उन्हें हटा दिया गया। उनके बाद अब्दुल कैसर हक आए, जो एक महीने में ही बदल दिए गए। अगला दायित्व वरिष्ठ आईएएस जेपी मौर्य को मिला। सरकार बदलने के बाद उनका भी स्थानांतरण कर दिया गया। इसके बाद जनक प्रसाद पाठक, फिर चंदन कुमार को अतिरिक्त प्रभार मिला। अगस्त 2024 में किरण कौशल आयुक्त बनीं, जिन्हें अप्रैल 2025 में हटाकर शिखा राजपूत तिवारी को जिम्मेदारी दी गई। अब नवंबर 2025 से रितेश अग्रवाल अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं।
मंत्री और आयुक्तों के बीच तालमेल पर सवाल
नई सरकार बनने के बाद भी आयुक्तों का कार्यकाल लंबा नहीं चल पा रहा है। विभाग से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि अधिकारियों और मंत्री के बीच तालमेल नहीं बन पा रहा। यही वजह बताई जा रही है कि सरकार जेपी मौर्य से लेकर अन्य आयुक्तों को भी जल्दी-जल्दी बदलती रही। जनक प्रसाद पाठक के कार्यकाल में लोकसभा चुनाव की ड्यूटी के कारण उन्हें उत्तर प्रदेश जाना पड़ा और अस्थायी रूप से चंदन कुमार को जिम्मेदारी दी गई।
क्यों बढ़ रहे हैं तबादले
सरकार ने पहले संचालक चिकित्सा शिक्षा की जगह आयुक्त का नया पद बनाया था। इसे स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक कसावट के लिए जरूरी बताया गया था। इसके साथ ही वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार डीएमई से लेकर आयुक्त को दिए गए। इसका विरोध भी हुआ। कांग्रेस का कहना है कि पूरा मामला वित्तीय निर्णयों से जुड़ा है और आयुक्त इन अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पा रहे। इसी कारण बार-बार तबादले हो रहे हैं।
आयुक्तों का कार्यकाल रिकॉर्ड
हाल के कार्यकाल के आंकड़ों पर नजर डालें तो नम्रता गांधी 92 दिन, अब्दुल कैसर हक 57 दिन, जेपी मौर्य 211 दिन और जनक प्रसाद पाठक 194 दिन पद पर रहे। चंदन कुमार को 31 दिन का अतिरिक्त प्रभार मिला। किरण कौशल ने 235 दिन काम किया, जबकि शिखा राजपूत तिवारी 191 दिन आयुक्त रहीं। रितेश अग्रवाल का कार्यकाल जारी है।
राजनीतिक पक्षों के आरोप और प्रतिक्रिया
कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ राकेश गुप्ता का कहना है कि सरकार ने डॉक्टरों के अधिकार कम करने की कोशिश की। उनके अनुसार डॉक्टरों के प्रबंधन से जुड़े फैसलों में लगातार दिक्कतें आईं और वित्तीय पक्ष को प्राथमिकता दी गई। इस वजह से अधिकारी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं दे पाए और स्थानांतरण होने लगे।
भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के पूर्व अध्यक्ष डॉ विमल चोपड़ा का कहना है कि पिछली सरकार ने व्यवस्था को कमजोर किया था। उनका मानना है कि अगर प्रशासनिक ढांचा बेहतर काम नहीं करेगा तो डीएमई को फिर से अधिकार लौटाने पर विचार किया जाएगा।
आगे की दिशा पर नजर
बार-बार तबादलों से चिकित्सा शिक्षा विभाग की स्थिरता प्रभावित हो रही है। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से जुड़े कई फैसले लंबित पड़ रहे हैं। अब सभी की निगाहें इस पर हैं कि रितेश अग्रवाल को मिले अतिरिक्त प्रभार का कार्यकाल कितना स्थिर रहता है और क्या विभाग में लगातार बदलाव का सिलसिला थमेगा।
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