
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में बने विवादित रेलवे ओवरब्रिज के बाद अब छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले से भी वैसा ही मामला सामने आया है। यहां करोड़ों की लागत से तैयार नया रेलवे ओवरब्रिज अपनी अजीबोगरीब बनावट की वजह से सुर्खियों में है। इस पुल का निर्माण ट्रैफिक की रफ्तार बढ़ाने के लिए किया गया था लेकिन इसका डिजाइन अब राहगीरों के लिए काल साबित हो सकता है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद ब्रिज के ऊपर दिया गया तीखा मोड़ अब तकनीकी विशेषज्ञों और आम जनता की समझ से परे है।
90 डिग्री का खौफनाक टर्न: इंजीनियरिंग की चूक या बड़ी लापरवाही?
इस रेलवे ओवरब्रिज की सबसे बड़ी खामी इसका लगभग 90 डिग्री वाला घुमाव है। सामान्यतः किसी भी फ्लाइओवर या ब्रिज पर टर्न को बहुत ही धीमा और लंबा रखा जाता है ताकि गाड़ियों का संतुलन न बिगड़े। मगर मनेन्द्रगढ़ के इस ब्रिज पर मोड़ इतना अचानक आता है कि ड्राइवर को संभलने का मौका ही नहीं मिलता। ट्रैफिक इंजीनियरिंग के मानकों को ताक पर रखकर बनाए गए इस तीखे मोड़ ने वाहन चालकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
भारी वाहनों के लिए ‘अंधा मोड़’: बस और ट्रकों के पलटने का डर
ब्रिज पर बने इस तीखे मोड़ ने बस और ट्रक जैसे भारी वाहनों के लिए बड़ा संकट पैदा कर दिया है। बड़े वाहनों को टर्न लेते समय अधिक जगह की जरूरत होती है लेकिन इस ब्रिज पर जगह की कमी और तीखे घुमाव की वजह से संतुलन बनाए रखना मुश्किल है। स्थानीय लोगों को डर है कि किसी दिन सवारी बस या सामान से लदा ट्रक अनियंत्रित होकर ब्रिज से नीचे गिर सकता है। मोड़ पर गाड़ियों के पहिए घिसने की आवाजें दूर तक सुनाई देती हैं जो किसी बड़ी अनहोनी का संकेत दे रही हैं।
रात के सन्नाटे में बढ़ जाता है खतरा: पर्याप्त लाइट और रेडियम का अभाव
ब्रिज पर सुरक्षा इंतजामों के नाम पर खानापूर्ति की गई है। रात के समय या बारिश के दौरान जब दृश्यता कम होती है, तब यह 90 डिग्री का मोड़ किसी ‘डेथ ट्रैप’ से कम नहीं लगता। मोड़ से पहले न तो कोई चेतावनी देने वाला चमकता हुआ बोर्ड लगा है और न ही पर्याप्त रिफ्लेक्टर्स (रैडियम) नजर आते हैं। स्पीड को नियंत्रित करने के लिए रंबल स्ट्रिप्स या छोटे ब्रेकर भी नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में अनजान ड्राइवर जो पहली बार इस रास्ते से गुजर रहा हो, उसके लिए दुर्घटना का शिकार होना लगभग तय माना जा रहा है।
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हादसे के इंतजार में प्रशासन? अधिकारियों ने साधी चुप्पी
मनेन्द्रगढ़ की जनता अब सवाल पूछ रही है कि क्या प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब इस ब्रिज का नक्शा पास हुआ था, तब इंजीनियरों ने इस तीखे मोड़ पर ध्यान क्यों नहीं दिया। करोड़ों रुपये के बजट वाली इस परियोजना में सुरक्षा मानकों की अनदेखी करना समझ से परे है। अब तक न तो रेलवे विभाग और न ही लोक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से इस दोषपूर्ण डिजाइन को लेकर कोई सफाई पेश की गई है।
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पुनः सर्वे और सुधार की मांग: लोगों ने दी आंदोलन की चेतावनी
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और वाहन चालकों ने मांग की है कि एक उच्च स्तरीय तकनीकी टीम से इस ब्रिज का दोबारा सर्वे कराया जाए। लोगों का कहना है कि अगर डिजाइन में सुधार संभव नहीं है, तो मोड़ को चौड़ा करने के लिए अतिरिक्त पिलर या सुरक्षा दीवार बनाई जाए। समय रहते अगर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो यहां की स्थिति भयावह हो सकती है। स्थानीय लोग अब इस मुद्दे को लेकर बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं ताकि सरकार की नींद खुले और जनता की जान बचाई जा सके।



