
छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए राज्य लोक सेवा आयोग (CGPSC) एक बार फिर बहस के केंद्र में है। प्रदेश के रोजगार बाजार और पीएससी की कार्यप्रणाली का एक बेहद दिलचस्प पहलू सामने आया है, जिसे ‘चुनावी कनेक्शन’ कहा जा सकता है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि राज्य में विधानसभा चुनाव के ठीक पहले वाले साल में नौकरियों की बंपर बौछार होती है, जबकि आम दिनों में यह रफ्तार सुस्त पड़ जाती है। वर्तमान में प्रदेश के करीब 15 लाख पंजीकृत बेरोजगारों में से आधे से अधिक उच्च शिक्षित हैं, जो लंबे समय से पीएससी के जरिए स्थायी रोजगार मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
चुनावी साल में ही क्यों आती है भर्तियों की बाढ़, राजनीतिक नफा-नुकसान का पूरा खेल
आयोग की पुरानी सालाना रिपोर्ट और विज्ञापनों के ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो पीएससी की भर्तियों का राजनीति से सीधा जुड़ाव दिखता है। साल 2018 के चुनावी वर्ष में राज्य के इतिहास में सबसे ज्यादा करीब 2 हजार पदों के लिए एक साथ वैकेंसी निकाली गई थी। ठीक इसी तरह, साल 2023 के चुनाव से ऐन पहले भी लगभग एक हजार पदों पर भर्ती की बड़ी प्रक्रिया शुरू की गई थी। जानकार मानते हैं कि युवा मतदाताओं और बेरोजगारों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए तमाम राजनीतिक पार्टियां पीएससी के इस पारंपरिक भर्ती दांव का इस्तेमाल करती रही हैं।
पिछली सरकार के पांच साल में 4700 से ज्यादा पद, लेकिन भर्ती के साथ जुड़े रहे बड़े विवाद
भर्ती के पिछले रिकॉर्ड को देखें तो पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के पांच साल के कार्यकाल के दौरान कुल 4717 अलग-अलग प्रशासनिक और तकनीकी पदों के लिए विज्ञापन जारी कर प्रक्रिया शुरू की गई थी। कांग्रेस शासन के दौरान साल 2018-19 में 1991 पदों के लिए 13 परीक्षाएं हुईं। इसके बाद अगले तीन सालों में क्रमशः 584, 503 और 665 पदों के लिए परीक्षाएं आयोजित की गईं। अंतिम चुनावी साल यानी 2022-23 में सबसे ज्यादा 974 पदों के लिए रिकॉर्ड 25 परीक्षाएं कराई गईं। हालांकि, इसी दौरान हुआ बहुचर्चित पीएससी घोटाला आज भी कोर्ट-कचहरी और जांच के दायरे में है, जिसने पूरी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
मौजूदा सरकार के ढाई साल में 1950 भर्तियां, रफ्तार बढ़ाने के लिए युवाओं का बढ़ा दबाव
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद नई भाजपा सरकार के पिछले ढाई साल के कार्यकाल पर नजर डालें तो भर्ती की गति थोड़ी धीमी नजर आती है। इस दौरान विभिन्न विभागों को मिलाकर करीब 1950 पदों के लिए ही भर्ती विज्ञापन जारी किए जा सके हैं। इनमें मुख्य रूप से राज्य सेवा परीक्षा 2023 के तहत 242 पद और राज्य सेवा परीक्षा 2024 के तहत 246 पदों पर ही मुख्य रूप से प्रशासनिक नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू हो पाई है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों का कहना है कि रिक्त पदों की संख्या के मुकाबले यह भर्ती ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
स्वास्थ्य और तकनीकी क्षेत्रों में भी शुरू हुई नियुक्तियां, प्रशासनिक पदों के लिए नए विज्ञापन की तैयारी
भले ही कुल पदों की संख्या कम दिख रही हो, लेकिन मौजूदा सरकार ने तकनीकी और चिकित्सा विभागों में रुकी हुई कुछ भर्तियों को आगे जरूर बढ़ाया है। पीएससी के जरिए स्वास्थ्य विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सक, साइकोलॉजिस्ट, फिजियोथैरेपिस्ट, डेमोंस्ट्रेटर और चिकित्सा शिक्षा से जुड़े सहायक प्राध्यापकों के पदों पर साक्षात्कार और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसके साथ ही उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, श्रम विभाग, बाल संरक्षण संस्थाओं और न्यायिक सेवा में भी नियुक्तियां जारी हैं। अधिकारियों के मुताबिक, राज्य सेवा परीक्षा 2025 के लिए भी पदों का खाका तैयार किया जा रहा है, जिसका विज्ञापन जल्द आ सकता है।
इस साल व्यापमं आयोजित करेगा 38 बड़ी परीक्षाएं, परीक्षा कैलेंडर के साथ तैयारी हुई तेज
छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (CG Vyapam) ने भी इस साल सरकारी नौकरी की आस लगाए युवाओं के लिए बड़ा मोर्चा संभाला है। व्यापमं की ओर से वर्ष 2026 के भीतर कुल 38 अलग-अलग भर्ती परीक्षाएं आयोजित किए जाने की मुकम्मल तैयारी की जा रही है। इसके लिए बकायदा आधिकारिक परीक्षा कैलेंडर भी जारी कर दिया गया है। इन परीक्षाओं में तकनीकी, स्वास्थ्य, लिपिकीय और तृतीय श्रेणी के हजारों पद शामिल हैं। व्यापमं की इस सक्रियता से उन अभ्यर्थियों को बड़ी उम्मीद बंधी है जो पीएससी के कड़े सिलेबस से अलग रहकर तकनीकी या विभागीय नौकरियों की तैयारी कर रहे हैं।
मंडी निरीक्षक भर्ती परीक्षा होगी इस साल की सबसे बड़ी जंग, लाखों उम्मीदवार होंगे शामिल
व्यापमं द्वारा जारी कैलेंडर के मुताबिक, इस साल होने वाली परीक्षाओं में मंडी निरीक्षक और मंडी उपनिरीक्षक की भर्ती परीक्षा को सबसे बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। इस एकल परीक्षा में पूरे प्रदेश से लगभग तीन से चार लाख अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। इस परीक्षा के लिए राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में बड़े परीक्षा केंद्र बनाए जाने की योजना है। इस साल को युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों का साल माना जा रहा है, बशर्ते परीक्षाएं बिना किसी पेपर लीक या प्रशासनिक लापरवाही के समय पर पूरी कराई जा सकें।
देरी और कानूनी अड़चनों पर आयोग की दलील, कई चरणों की प्रक्रिया के कारण लगता है समय
भर्तियों में होने वाली अत्यधिक देरी और लटके हुए परीक्षा परिणामों को लेकर पीएससी प्रबंधन और विशेषज्ञों का अपना तर्क है। आयोग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पीएससी पूरी तरह नियमित रूप से कैलेंडर के अनुसार काम कर रहा है। किसी भी परीक्षा का परिणाम अटकने के पीछे प्रशासनिक कारणों से ज्यादा मामला उच्च न्यायालय में लंबित होना होता है। आरक्षण या अन्य तकनीकी विवादों के कारण कोर्ट से स्टे मिलने पर मजबूरन प्रक्रिया रोकनी पड़ती है। इसके अलावा प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा, साक्षात्कार और लंबी कॉपियों के मूल्यांकन के चलते अंतिम चयन सूची जारी होने में स्वाभाविक रूप से एक से दो साल का समय लग जाता है।
अभ्यर्थियों की केवल एक ही प्रमुख मांग: समय पर आए रिजल्ट और निष्पक्ष हो पूरी चयन प्रक्रिया
इन तमाम राजनीतिक दावों और प्रशासनिक दलीलों के बीच धूप-धूल में तपकर पढ़ाई करने वाले आम अभ्यर्थियों की मांगें बेहद सामान्य और जायज हैं। सिविल लाइन रायपुर और बिलासपुर के कोचिंग हब में तैयारी कर रहे युवाओं का कहना है कि उन्हें केवल पारदर्शी और साफ-सुथरी चयन प्रक्रिया चाहिए। सरकार चाहे किसी की भी हो, विज्ञापनों के बाद परीक्षा का समय, परिणाम जारी करने की तारीख और अंतिम नियुक्ति पत्र सौंपने की पूरी समय-सीमा पहले से तय होनी चाहिए। युवाओं की सबसे बड़ी चिंता यही है कि अनावश्यक लेती-लतीफी और कोर्ट-कचहरी के चक्कर में उनकी उम्र सीमा समाप्त न हो जाए।



