
CG Farmers Nyay Yatra:छत्तीसगढ़ में भारतीय किसान संघ ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ ने 8 अक्टूबर 2026 से राज्य भर में ‘बलराम किसान न्याय यात्रा’ शुरू करने का ऐलान किया है। इस आंदोलन के तहत किसान कवर्धा सहित विभिन्न जिला मुख्यालयों के प्रमुख प्रवेश द्वारों पर ट्रैक्टरों के साथ जमा होंगे। संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह प्रदर्शन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 33 जिलों में कलेक्टरों के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
गन्ने का ₹30 करोड़ से अधिक का भुगतान अटका
Balram Kisan Nyay Yatra: किसानों के इस आंदोलन का सबसे प्रमुख कारण कबीरधाम (कवर्धा) स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाने द्वारा गन्ने का बकाया भुगतान न किया जाना है। भारतीय किसान संघ का दावा है कि किसानों का 30 करोड़ रुपये से अधिक का गन्ना भुगतान लंबे समय से लंबित है। इसके साथ ही गन्ने पर घोषित 100 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी नहीं मिला है। किसानों की मांग है कि बकाया राशि का तुरंत भुगतान किया जाए और शक्कर कारखाने की पेराई क्षमता का विस्तार किया जाए।
धान के दाम और खाद-बीज की कमी पर जताई नाराजगी
Chhattisgarh Farmers Protest:किसान संघ ने खेती की बढ़ती लागत को देखते हुए धान के समर्थन मूल्य में संशोधन करने और ‘कृषक उन्नति योजना’ के लाभ का दायरा बढ़ाने की मांग की है। इसके अलावा, ऐन बुवाई और फसल के समय यूरिया खाद तथा गुणवत्तापूर्ण बीजों की किल्लत पर भी गहरा आक्रोश जताया गया है। संगठन का कहना है कि हर सीजन में किसानों को खाद-बीज के लिए भटकना पड़ता है, जिसका स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए।
कवर्धा के प्रमुख मार्गों पर रहेगा जमावड़ा, एंबुलेंस को मिलेगी छूट
Kawardha News Update: आंदोलन की रणनीति के तहत कवर्धा शहर के प्रमुख प्रवेश मार्गों पर किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ जुटेंगे। हालांकि, भारतीय किसान संघ ने आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण रखने की बात कही है। प्रदर्शनकारी किसान मार्गों पर हरी कीर्तन करते हुए बैठेंगे। संगठन ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन वाहनों की आवाजाही में कोई बाधा न आए और उनका रास्ता पूरी तरह खुला रखा जाए।
रायपुर में प्रदर्शन के बाद अब पूरे प्रदेश में आंदोलन का विस्तार
इससे पहले भी भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में किसानों ने राजधानी रायपुर के आंबेडकर चौक पर धरना देकर अपनी आवाज उठाई थी। बकाया भुगतान और समर्थन मूल्य को लेकर लगातार मिल रहे आश्वासनों के बावजूद कार्रवाई न होने पर अब इस आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया गया है। 8 अक्टूबर को राज्य के सभी 33 जिलों में एक साथ ज्ञापन सौंपने और धरना देने से शासन-प्रशासन पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।



