
Gyanesh Kumar Controversies: देश में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को रद्द करने की मांग को लेकर राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमा गया है। दिल्ली, मुंबई और पटना के बाद अब छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई जा रही है। विपक्ष और विभिन्न संगठनों का आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा लिए गए कुछ फैसले पारदर्शी नहीं हैं और इनसे नागरिकों के मताधिकार पर असर पड़ रहा है।
रायपुर के घड़ी चौक पर शाम 4 बजे रणनीति बैठक
Raipur Ghadi Chowk Protest: देशभर में ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच अब राजधानी रायपुर में भी आंदोलन की तैयारियां तेज हो गई हैं। प्रदर्शन की आगे की रूपरेखा तय करने और रणनीति बनाने के लिए आज शाम 4:00 बजे घड़ी चौक स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा के पास एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। प्रदर्शनकारियों ने एक वोट की ताकत को रेखांकित करते हुए संदेश जारी किया है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार मात्र एक वोट से गिर गई थी, जिससे साफ होता है कि हर नागरिक का मत कितना अनमोल है। इसी संदेश के साथ नागरिकों और प्रदर्शनकारियों व स्टूडेंट्स को घड़ी चौक पर एकत्रित होकर विरोध-प्रदर्शन की रणनीति बैठक में शामिल होने का आह्वान किया गया है।
मतदाता सूची संशोधन (SIR) में अनियमितता और प्रक्रियागत उल्लंघन के आरोप
SIR Controversy India: मुख्य चुनाव आयुक्त पर सबसे प्रमुख आरोप मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर है। याचिकाकर्ताओं और पूर्व अधिकारियों का कहना है कि देश भर में एक साथ बड़े पैमाने पर नाम हटाने और नए फॉर्म से जुड़ी शर्तें जोड़ने की प्रक्रिया अवैध है। आरोप है कि नए नियमों के तहत 2003 की मतदाता सूची के विवरण मांगने से गरीब और युवा मतदाताओं के पंजीकरण में बाधा आई है। इसे ‘वोट चोरी’ का आधार बताते हुए इसके खिलाफ आवाज उठाई जा रही है।
चुनाव आयोग के आंतरिक फैसलों में साथी आयुक्तों की उपेक्षा का दावा
Election Commission News: मीडिया रिपोर्ट्स और विपक्ष के दावों के अनुसार, चुनाव आयोग के भीतर सहमति का अभाव देखने को मिला है। आरोप लगाया गया है कि पिछले 10 महीनों में डिजिटल सिस्टम और मतदाता सूची से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर अन्य दो चुनाव आयुक्तों ने दर्जनों बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इसके बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा उनके सुझावों को नजरअंदाज करते हुए एकतरफा निर्णय लिए गए, जो आयोग की सर्वसम्मति की परंपरा के विपरीत है।
पुराने सेवा काल से जुड़े ठेकों की प्रक्रिया में वित्तीय गड़बड़ी के आरोप
Raipur Protest: इसके अतिरिक्त, ज्ञानेश कुमार के पूर्व में केरल कैडर के प्रशासनिक अधिकारी (IAS) के रूप में दिए गए कार्यकाल से जुड़े कुछ पुराने मामले भी चर्चा में आए हैं। केरल सरकार द्वारा उनके लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव पद पर रहते समय सड़क निर्माण ठेकों में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सतर्कता (विजिलेंस) जांच से जुड़े दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों को चुनाव आयोग और सरकार ने खारिज किया है।
विपक्ष की इस्तीफे की मांग और केंद्र सरकार तथा आयोग का पक्ष
विपक्षी राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों ने इन आरोपों के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त से तत्काल इस्तीफे की मांग की है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और केंद्र सरकार का स्पष्ट कहना है कि आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और इसके सभी अंतिम निर्णय स्थापित नियमों व प्रक्रियाओं का पालन करते हुए सर्वसम्मति से लिए गए हैं। सरकार के अनुसार, मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक पारदर्शी प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को शत-प्रतिशत सटीक बनाना है।
संविधान में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया और पात्रता के नियम
भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 और वर्ष 2023 के नए अधिनियम के तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की जाती है। नियुक्ति तीन सदस्यीय चयन समिति (जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं) की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। इस पद के लिए व्यक्ति का केंद्र या राज्य सरकार में सचिव स्तर का अधिकारी होना, प्रशासनिक ईमानदारी और चुनाव संचालन का अनुभव होना आवश्यक है। इनका कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के कड़े संवैधानिक प्रावधान
मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाना साधारण प्रक्रिया नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार, CEC को केवल उसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है जिससे सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है। चुनाव आयोग को राजनीतिक दबावों से मुक्त रखने और उसकी स्वायत्तता बनाए रखने के लिए यह कड़ा नियम बनाया गया है। अन्य चुनाव आयुक्तों को भी मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश के बिना नहीं हटाया जा सकता।
संसद में महाभियोग प्रस्ताव और जांच प्रक्रिया की कानूनी रूपरेखा
मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए संसद के किसी भी सदन में प्रस्ताव लाया जा सकता है। इसके लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों या राज्यसभा में 50 सांसदों का लिखित नोटिस आवश्यक होता है। प्रस्ताव स्वीकार होने पर एक विशेष जांच समिति गठित की जाती है जो आरोपी अधिकारी पर लगे ‘सिद्ध कदाचार या अक्षमता’ के प्रमाणों की जांच करती है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संसद के दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित होना अनिवार्य है, जिसके बाद राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी करते हैं।



