
नई दिल्ली: दीपावली के पाँच दिवसीय उत्सव का समापन भाई दूज के पावन पर्व के साथ होता है। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज मनाया जाता है, जिसे भ्रातृ द्वितीया या यम द्वितीया भी कहा जाता है। इस वर्ष यह पर्व 23 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा।
भाई दूज 2025: शुभ मुहूर्त और तिथि
पंचांग के अनुसार, भाई दूज की तिथि 22 अक्टूबर, बुधवार की रात 8:16 बजे से शुरू होकर 23 अक्टूबर, गुरुवार की रात 10:46 बजे तक रहेगी। इस दिन बहनें अपने भाइयों का तिलक कर उनके सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती हैं।
टीका करने के प्रमुख शुभ मुहूर्त
भाई दूज पर तिलक करने के लिए इस बार कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं, जिनमें पूजा करना अत्यंत फलदायी होगा:
- सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: दोपहर 1:13 बजे से 3:28 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से 12:28 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 1:58 बजे से 2:43 बजे तक
- गोधूली मुहूर्त: शाम 5:43 बजे से 6:09 बजे तक
इस वर्ष भाई दूज सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग में मनाया जाएगा, जो इस पर्व को और भी अधिक शुभ बना रहा है।
भाई दूज की पूजन विधि
भाई दूज के दिन बहनें अपने भाइयों के लिए विशेष पूजा करती हैं:
- बहनें प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल पर भगवान गणेश और चित्रगुप्त की पूजा करें।
- बहनें चौकी पर अपने भाई को बिठाकर तिलक लगाती हैं, आरती उतारती हैं और उन्हें मिठाई खिलाती हैं।
- भाई, बहन को उपहार देकर उसके स्नेह का आदर करता है और उसकी रक्षा का वचन देता है।
पर्व का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाई दूज पर भगवान चित्रगुप्त की पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और आयु में वृद्धि होती है। यह पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और भी मजबूत करता है। कहा जाता है कि इस दिन बहन के घर भोजन करने से भाई के जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
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