
हाल ही में सिंधी और अग्रवाल समाज के इष्टदेव के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी से समाजों में नाराजगी बढ़ गई है। कई संगठनों ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई और कार्रवाई की मांग की। इसके बाद विभिन्न समाज एकजुट होकर छत्तीसगढ़िया और परदेसिया के नाम पर फैलाए जा रहे विवाद का विरोध कर रहे हैं। इसी मुद्दे पर प्रदेश में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए 7 दिसंबर को एक बड़े महासम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें सर्व समाज के लोग शामिल होंगे।
समाजों में एकता की अपील
रावणभाठा मैदान में चार वर्ष पहले धर्मसभा आयोजित करने वाली समिति के सदस्य नीलकंठ त्रिपाठी इस महासम्मेलन का नेतृत्व कर रहे हैं। कार्यक्रम दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में होगा, जहां समाज के बीच आपसी समझ बढ़ाने और भड़काने वाले तत्वों से दूर रहने पर सहमति बनाई जाएगी। आयोजन में यह संदेश दिया जाएगा कि राज्य की एकता सबसे बड़ी ताकत है और किसी भी समूह को अशांति फैलाने का अवसर नहीं देना चाहिए।
भड़काने वाली गतिविधियों से सावधान रहने की सलाह
आयोजक समूह का कहना है कि कुछ लोग छत्तीसगढ़िया और परदेसिया के नाम पर समाज में दूरी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। महासम्मेलन में लोगों को जागरूक किया जाएगा कि ऐसे उकसावे से बचें और सामाजिक तानेबाने को मजबूत बनाएं। सभा का उद्देश्य किसी भी तरह की गलतफहमी दूर कर आपसी भाईचारा बढ़ाना है।
इष्टदेव के सम्मान और सामाजिक सौहार्द पर जोर
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि किसी भी समाज की भावनाएं आहत न हों और किसी इष्टदेव का अनादर न हो, इसके लिए मिलकर प्रयास जरूरी है। महासम्मेलन का मुख्य संदेश यही रहेगा कि भविष्य में कोई भी संगठन या व्यक्ति सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचाने की हिम्मत न कर सके।
पर्व–त्योहार में मर्यादा और परंपरा का सम्मान
सभा में गणेश पर्व, दुर्गा उत्सव और अन्य त्योहारों में फूहड़ता रोकने पर भी चर्चा होगी। प्रतिभागी सुझाव देंगे कि देवी–देवताओं की मूर्तियां पारंपरिक स्वरूप में ही स्थापित की जाएं और धार्मिक आयोजनों में वैदिक पद्धति का पालन हो। साथ ही सनातन परंपराओं के अपमान पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई जाएगी।
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