DPI ने शिक्षाकर्मियों के संविलियन का मांगा हिसाब: प्रदेशभर के DEO को लिखा पत्र

लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने प्रदेशभर के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखकर शिक्षाकर्मियों (पंचायत व नगर निगम) के संविलियन के संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी है। DPI ने डीईओ से यह बताने को कहा है कि 14 नवंबर 2025 की स्थिति में कितने शिक्षाकर्मियों का संविलियन नहीं हो पाया है। यह कदम शिक्षा विभाग में संविलियन की स्थिति को स्पष्ट करने और लंबित मामलों को तेजी से निपटाने की दिशा में उठाया गया है।

संविलियन की जानकारी भेजने के लिए 17 नवंबर की डेडलाइन

डीपीआई ने प्रदेशभर के डीईओ को संविलियन से संबंधित पूरी जानकारी भेजने के लिए एक कड़ी डेडलाइन तय कर दी है। निर्धारित तिथि 17 नवंबर 2025 तक सभी डीईओ को हर हाल में संविलियन के संबंध में मांगी गई जानकारी DPI को भेजनी होगी। यह निर्देश स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 28 अक्टूबर 2025 को पूर्व में जारी किए गए पत्र के हवाले के साथ दिया गया है।

अधूरे संविलियन का पूछा गया कारण, DPI ने मांगी स्पष्टता

डीपीआई ने डीईओ को लिखे पत्र में संख्या के साथ-साथ संविलियन न हो पाने के कारणों की भी स्पष्ट जानकारी मांगी है। DPI जानना चाहता है कि यदि किसी शिक्षाकर्मी का संविलियन अब तक नहीं हो पाया है, तो इसके पीछे क्या कारण हैं। यह जानकारी लंबित मामलों की जड़ तक पहुँचने और नियमों में आवश्यक सुधार या प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने में सहायक होगी।

पूर्व में भेजे गए प्रपत्र में भरकर देनी होगी जानकारी

डीपीआई ने डीईओ को याद दिलाया है कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पूर्व में जारी किए गए पत्र के साथ भेजे गए निर्धारित प्रपत्र में ही मांगी गई जानकारी को भरकर DPI को भेजा जाना है। यह प्रक्रिया डेटा को व्यवस्थित और तुलनात्मक बनाने में मदद करेगी, जिससे प्रदेश स्तर पर संविलियन की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन किया जा सके।

डीईओ पर बढ़ा दबाव, संविलियन मामलों को जल्द निपटाने की तैयारी

डीपीआई द्वारा सख्त समय सीमा और विस्तृत कारण पूछे जाने से प्रदेशभर के जिला शिक्षा अधिकारियों पर अब दबाव बढ़ गया है। उन्हें तय तिथि तक संविलियन की वर्तमान स्थिति को लेकर तेजी से काम करना होगा। यह कदम दर्शाता है कि सरकार शिक्षाकर्मियों के संविलियन जैसे दीर्घकालिक लंबित मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाना चाहती है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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