CG Patwari Strike Action: पटवारियों के हड़ताल से किसानों की बढ़ी मुश्किलें, सरकार ने लिया बड़ा एक्शन, 150 पटवारी निलंबित और 1000 से ज्यादा को नोटिस, जानें क्या है इनकी मांगे

Chhattisgarh Patwari Strike Action: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, लेकिन दूसरी तरफ पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने प्रशासनिक मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राजस्व विभाग के इन कर्मचारियों के बिना धान खरीदी केंद्रों तक फसल का सत्यापन होना असंभव माना जा रहा है। अक्टूबर महीने से शुरू हुआ यह आंदोलन अब सरकार और पटवारियों के बीच सीधी टकराव की स्थिति में पहुंच गया है। सरकार ने पहले समझाइश देने के बाद अब सख्ती का रास्ता अपना लिया है, जिसके तहत प्रदेशभर में 150 से अधिक पटवारियों को निलंबित किया जा चुका है और 1,000 से ज्यादा को ब्रेक इन सर्विस (सेवा में व्यवधान) का नोटिस थमाया गया है।

धान खरीदी और डिजिटल सर्वे पर संकट के बादल

Dhan Kharidi Impact Patwari Strike CG: पटवारियों के हड़ताल पर जाने से आम किसानों की मुसीबतें सबसे ज्यादा बढ़ गई हैं। खेतों का डिजिटल क्रॉप सर्वे रुका हुआ है, गिरदावरी का काम बंद है और एग्रीस्टैक तथा किसान अभिलेखों का सत्यापन अटका हुआ है। इसके अलावा जमीन के नामांतरण और बंटवारे के कार्य भी पूरी तरह ठप पड़े हैं। स्थिति यह बन गई है कि जिन किसानों के खेतों का भौतिक सत्यापन नहीं हुआ है, वे आगामी समर्थन मूल्य पर अपना धान बेचने से वंचित हो सकते हैं।

महासमुंद जिले में पांच और पटवारियों पर निलंबन की गाज

Mahasamund Patwari Suspension News: इस बीच महासमुंद जिले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए पांच पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कलेक्टर विनय लंगेह के निर्देश पर यह कार्रवाई राजस्व कार्यों में लगातार मिल रही धीमी प्रगति और लापरवाही के चलते की गई है। बागबाहरा तहसील से तीन, जबकि बसना और सरायपाली अनुविभाग से एक-एक पटवारी को इस कार्रवाई के दायरे में लिया गया है। खास बात यह है कि निलंबित किए गए ये सभी कर्मचारी भी चल रही हड़ताल में शामिल थे।

पीवी ऐप की तकनीकी खामियों को लेकर अड़े हैं पटवारी

CG Patwari Andolan PV App Dispute: इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ नया फिजिकल वेरिफिकेशन (PV) ऐप है, जिसे खेतों में फसल के भौतिक सत्यापन के लिए अनिवार्य किया गया है। पटवारियों का आरोप है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की भारी समस्या है जिसके कारण ऐप ठीक से काम नहीं करता है। सर्वर बार-बार डाउन रहने से डेटा अपलोड करने में घंटों का समय लगता है। बिना उचित प्रशिक्षण के पॉलीगॉन मैपिंग जैसे कठिन काम थोपने और पुराने भुइयां प्लेटफॉर्म को अचानक बंद करने से कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।

सरकार द्वारा जारी नोटिस और चेतावनी का कड़ा रुख

शासन स्तर पर सख्ती दिखाते हुए बिलासपुर संभाग के 259 और सरगुजा संभाग के 819 समेत एक हजार से अधिक पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर काम पर लौटकर अपना स्पष्टीकरण दें, अन्यथा उनकी अनुपस्थिति को सेवा में व्यवधान मानते हुए एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का यह संदेश साफ है कि काम पर न लौटने वालों की नौकरी पर बड़ा खतरा आ सकता है।

कर्मचारी फेडरेशन की एंट्री और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

इस टकराव के बीच छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने सरकार की इस सख्ती पर तीखी नाराजगी जताई है। फेडरेशन के प्रदेश संयोजक कमल वर्मा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। फेडरेशन की मांग है कि पटवारियों के खिलाफ की गई निलंबन, ट्रांसफर और नोटिस जैसी सभी दंडात्मक कार्रवाई तुरंत रोकी जाएं तथा बातचीत के जरिए समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।

किसानों के हितों को ध्यान में रखकर समाधान की तलाश जारी

Dhan Kharidi Impact Patwari Strike CG: एक तरफ शासन प्रशासनिक सख्ती के जरिए कामकाज पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ पटवारी संघ अपनी पुरानी मांगों और वेतन विसंगति को दूर करने की जिद पर अड़ा हुआ है। इस रस्साकशी के बीच सबसे बड़ी पशोपेश में अन्नदाता किसान फंसे हुए हैं, जिनकी गाढ़ी कमाई का धान इस समय सरकारी दस्तावेजों के सत्यापन की बाट जोह रहा है। यदि जल्द ही कोई बीच का रास्ता नहीं निकला, तो धान खरीदी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

पटवारियों के प्रमुख आरोप और मांग

  1. नेटवर्क और कनेक्टिविटी की समस्या: ग्रामीण इलाकों और खेतों में मोबाइल नेटवर्क न मिलने के कारण पीवी ऐप काम ही नहीं करता है।
  2. सर्वर डाउन और धीमी गति: सर्वर बार-बार ठप हो जाता है, जिससे सर्वे का डेटा अपलोड करने में घंटों का समय बर्बाद होता है।
  3. बिना ट्रेनिंग के कठिन कार्य थोपना: मैदानी अमले को बिना किसी पूर्व प्रशिक्षण के पॉलीगॉन मैपिंग जैसे तकनीकी रूप से जटिल कार्य करने के लिए बाध्य किया जा रहा है।
  4. अचानक सॉफ्टवेयर बदलना: बिना पर्याप्त तैयारी के पुराना और सुचारू रूप से काम करने वाला ‘भुइयां’ प्लेटफॉर्म अचानक बंद कर नया ऐप थोप दिया गया है।
  5. अतिरिक्त काम का भारी दबाव: डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक, किसान पंजीयन और स्वामित्व योजना जैसे कई बड़े कामों का बोझ एक साथ डाल दिया गया है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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