
धमतरी जिले के मगरलोड ब्लॉक से एक विचलित करने वाली खबर सामने आई है। ग्राम पंचायत बिरझुली के आश्रित गांव पेण्ड्रा में भीषण पेयजल संकट गहरा गया है। आलम यह है कि गांव में पहले से मौजूद सरकारी बोर का जलस्तर काफी नीचे गिर चुका है, जिससे हैंडपंपों ने दम तोड़ दिया है। पानी की बूंद-बूंद के लिए मोहताज ग्रामीण अब अपनी प्यास बुझाने के लिए तालाबों और बरसाती झरनों के दूषित पानी का सहारा ले रहे हैं। गंदा पानी पीने की मजबूरी ने गांव में बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ा दिया है।
जिला कार्यालय पहुंचे ग्रामीण, नवीन बोर की मांग
पेयजल की गंभीर समस्या से त्रस्त पंचायत प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण गुरुवार को जिला मुख्यालय पहुंचे। कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पीने के पानी का कोई दूसरा विकल्प मौजूद नहीं है। महिलाओं को कोसों दूर से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पेण्ड्रा में तत्काल नए बोर खनन की मंजूरी दी जाए और गांव की हर गली तक पाइपलाइन का विस्तार किया जाए ताकि लोगों को घर के पास ही शुद्ध पेयजल मिल सके।
भवन के अभाव में संकट में महिला समूहों का रोजगार
पानी की किल्लत के साथ-साथ पेण्ड्रा के महिला स्वयं सहायता समूहों ने भी अपनी व्यथा सुनाई है। मोंहदी क्लस्टर के तहत आने वाले नमन महिला ग्राम संगठन में 8 समूहों की कुल 122 सदस्य शामिल हैं। ये महिलाएं महुआ, हर्रा, बेहड़ा और भुईनीम जैसी वनोपजों की खरीदी और किराना दुकान चलाकर अपनी जीविका चलाती हैं। लेकिन गांव में सामुदायिक भवन या महिला सदन न होने के कारण उन्हें वनोपजों के भंडारण और बैठकें आयोजित करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कलेक्टर से की गई महिला सदन भवन की मांग
ग्रामीण महिलाओं ने प्रशासन को बताया कि भवन नहीं होने की वजह से उनकी मेहनत से जुटाई गई वनोपज खुले में पड़ी रहती है, जिससे उनके खराब होने का डर बना रहता है। समूह की सदस्यों ने मांग की है कि उनके आर्थिक स्वावलंबन को देखते हुए गांव में अतिशीघ्र एक सर्वसुविधायुक्त महिला सदन भवन स्वीकृत किया जाए। इससे न केवल दुकान चलाने में आसानी होगी, बल्कि समूहों की गतिविधियों में भी तेजी आएगी।
ज्ञापन सौंपने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल
कलेक्ट्रेट पहुंचने वाले दल में रामायण सिन्हा, गैंदी ध्रुव, रीमा ध्रुव और ईश्वरी साहू समेत दर्जनों ग्रामीण शामिल थे। ग्रामीणों ने चेताया है कि यदि जल्द ही पेयजल समस्या का समाधान नहीं हुआ और भवन की मांग पूरी नहीं की गई, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल प्रशासन ने उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया है। इस दौरान बेला साहू, भगवती, सदाराम और धनसाय साहू जैसे ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को प्रमुखता से अधिकारियों के सामने रखा।
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