
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में सुकमा के डीएसपी तोमेश वर्मा पर हुए जानलेवा हमले ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है। यह हमला किसी अपराधी या नक्सली ने नहीं, बल्कि एक ऐसी महिला ने किया है जिसका डीएसपी से पुराना विवाद चल रहा था। महिला अपने एक मित्र, जो रिटायर्ड फौजी है, के साथ दुर्ग जिले से करीब 350 किलोमीटर का सफर तय कर दंतेवाड़ा पहुंची थी। शुक्रवार को जब डीएसपी किसी सरकारी काम से कोर्ट आए थे, तभी इन दोनों ने उन्हें घेर लिया और करीब दो घंटे तक चाकू की नोक पर बंधक बनाए रखा। जैसे ही मौका मिला, आरोपियों ने डीएसपी की गर्दन पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिए, जिससे वे लहूलुहान हो गए।
कार में बंधक बनाकर बीच सड़क पर किया हमला
वारदात उस वक्त शुरू हुई जब डीएसपी तोमेश वर्मा दंतेवाड़ा सत्र न्यायालय के बाहर अपनी कार के पास थे। बातचीत के बहाने महिला और रिटायर्ड फौजी उनकी गाड़ी में बैठ गए। बैठते ही महिला ने उन पर चाकू टिका दिया और गाड़ी को शहर की सड़कों पर इधर-उधर घुमाने को कहा। जैसे ही कार टीवीएस शोरूम के पास पहुंची, साथ बैठे फौजी ने डीएसपी की गर्दन पर हमला कर दिया। घायल अवस्था में खुद को बचाने के लिए डीएसपी कार से बाहर कूदे और अपनी रिवॉल्वर निकाल ली। बीच सड़क पर खून से लथपथ पुलिस अधिकारी को देख वहां भगदड़ मच गई। पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों हमलावरों को रंगे हाथ दबोच लिया है।
एक साल पुरानी FIR और ‘रेप’ के आरोपों का कनेक्शन
इस खूनी हमले के पीछे की वजह काफी गहरी है। जांच में सामने आया है कि हमलावर महिला ने ठीक एक साल पहले 20 दिसंबर 2024 को दुर्ग के मोहन नगर थाने में डीएसपी तोमेश वर्मा के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कराया था। हमले की कड़ियां इस प्रकार जुड़ी हैं:
- दुष्कर्म का आरोप: महिला ने डीएसपी पर घर में घुसकर अनाचार और मारपीट करने का इल्जाम लगाया था।
- कोर्ट का मामला: यह केस फिलहाल अदालत में विचाराधीन है और इसी रंजिश के चलते महिला ‘बदला’ लेना चाहती थी।
- नियोजित साजिश: महिला ने अपने फौजी साथी के साथ मिलकर पूरी प्लानिंग की और अधिकारी की लोकेशन ट्रैक करते हुए दंतेवाड़ा तक पहुंच गई।
- गिरफ्तारी: पुलिस ने आरोपी महिला रंजिता वर्मा और रविशंकर साहू को धारदार हथियारों के साथ जेल भेज दिया है।
DSP की हालत अब खतरे से बाहर, पुलिस जांच जारी
हमले के तुरंत बाद घायल तोमेश वर्मा को दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। गर्दन पर गहरा घाव होने के कारण उनकी काफी खून बह चुका था, लेकिन समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बच गई। दंतेवाड़ा एसपी गौरव रॉय ने पुष्टि की है कि डीएसपी अब खतरे से बाहर हैं और डॉक्टरों की निगरानी में हैं। इस घटना ने वीआईपी सुरक्षा और व्यक्तिगत रंजिशों के हिंसक रूप लेने पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या इस साजिश में इन दोनों के अलावा कोई और भी शामिल था।



