
पुरे देश सहित छत्तीसगढ़ के इंटरनेट जगत और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का एक अनोखा अभियान तेजी से वायरल हो रहा है। राज्य के पढ़े-लिखे लेकिन बेरोजगार युवाओं ने मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था, भ्रष्टाचार, लगातार बढ़ती जा रही बेरोजगारी और महंगी होती उच्च शिक्षा के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने के लिए इस डिजिटल मोर्चे का गठन किया है। छत्तीसगढ़ के डिजिटल स्पेस में इस पार्टी के नाम से कई अकाउंट्स और पेजेस सक्रिय हो चुके हैं, जिन्हें स्थानीय युवाओं का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। हालांकि, यह कोई चुनाव आयोग में पंजीकृत वास्तविक राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि सिस्टम की कमियों पर चोट करने के लिए युवाओं द्वारा चलाया जा रहा एक विशुद्ध व्यंग्यात्मक (सैटायर) आंदोलन है।

देश के मुख्य न्यायाधीश के बयान से भड़का गुस्सा, इंटरनेट पर ऐसे हुई इस अनोखे अभियान की शुरुआत
इस पूरे डिजिटल आंदोलन की नींव सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत द्वारा युवाओं को लेकर की गई एक कथित टिप्पणी के बाद पड़ी। दरअसल, एक मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने सिस्टम की आलोचना करने वाले और सोशल मीडिया पर राय रखने वाले युवाओं की तुलना कथित तौर पर ‘कॉकरोच’ और परजीवियों से कर दी थी। देश के मुख्य न्यायाधीश के मुंह से ऐसी बात सुनकर सोशल मीडिया पर सक्रिय युवा वर्ग आहत हो गया। युवाओं का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट को देश के संविधान और अभिव्यक्ति की आजादी का सबसे बड़ा रक्षक माना जाता है, ऐसे में युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों पर इस तरह की टिप्पणी करना पूरी तरह अनुचित है। इसी के विरोध स्वरूप इंटरनेट पर यह नया अभियान शुरू हो गया।

महज चार दिनों में इंस्टाग्राम पर उमड़ा फॉलोअर्स का सैलाब, करोड़ों युवाओं ने ली सदस्यता
जैसे ही छत्तीसगढ़ सहित देश भर के युवाओं को मुख्य न्यायाधीश के इस बयान की जानकारी मिली, सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के आधिकारिक हैंडल्स की तरफ लोगों का ध्यान गया। देखते ही देखते इसके इंस्टाग्राम हैंडल पर फॉलोअर्स की संख्या में भारी उछाल आया और महज चार दिनों के भीतर यह आंकड़ा 1.18 करोड़ की संख्या को पार कर गया। इतना ही नहीं, एक्स (पहले ट्विटर) और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर भी इस अभियान से जुड़ने वालों की कतार लग गई है। इस वर्चुअल दल की अपनी एक सक्रिय वेबसाइट भी तैयार हो चुकी है, जिस पर अब तक दो लाख से अधिक लोगों ने बतौर डिजिटल सदस्य अपना पंजीकरण करा लिया है।

पुणे के अभिजीत दीपके हैं आंदोलन के मुख्य सूत्रधार, बीबीसी मराठी से बातचीत में खोला पूरा राज
इंटरनेट पर तेजी से पैर पसार रही इस कॉकरोच जनता पार्टी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इसके संस्थापक और मुख्य संयोजक का नाम अभिजीत दीपके है। अभिजीत ने मीडिया से बातचीत में इस डिजिटल विद्रोही आइडिया के पीछे की पूरी कहानी साझा की है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने सोशल मीडिया पर मुख्य न्यायाधीश का वह बयान देखा, तो उन्हें यह बात बेहद अजीब और हास्यास्पद लगी। अभिजीत के मुताबिक, जब देश का पढ़ा-लिखे युवा अपने अधिकारों, रोजगार और महंगी फीस के खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो उन्हें व्यवस्था सुधारने के बजाय कीड़े-मकौड़ों की संज्ञा दे दी जाती है। इसी वैचारिक विरोध को दर्ज कराने के लिए उन्होंने व्यंग्य को अपना हथियार बनाया।

मुख्य न्यायाधीश ने दी मामले पर सफाई, कहा- मीडिया के एक वर्ग ने गलत तरीके से पेश की बात
सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम से चल रहे इस देशव्यापी अभियान और युवाओं के तीखे आक्रोश को देखते हुए खुद मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को भी इस मामले में अपना पक्ष रखना पड़ा। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अपनी टिप्पणी को लेकर सफाई जारी करते हुए कहा कि उनके बयान को पूरी तरह से संदर्भ से बाहर जाकर देखा गया है। मुख्य न्यायाधीश के अनुसार, मीडिया के एक चुनिंदा वर्ग ने उनकी अदालत की टिप्पणियों को गलत तरीके से और तोड़-मरोड़कर जनता के सामने पेश किया, जिससे युवाओं के बीच यह गलतफहमी पैदा हुई। उनका मकसद किसी की भी लोकतांत्रिक स्वतंत्रता को ठेस पहुंचाना नहीं था।
छत्तीसगढ़ की जमीनी हकीकत से जुड़ा आंदोलन, स्थानीय स्तर पर वायरल हो रहे डिजिटल मीम्स
भले ही इस आंदोलन की शुरुआत राष्ट्रीय स्तर की एक घटना से हुई हो, लेकिन छत्तीसगढ़ के युवाओं ने इसे अपने स्थानीय मुद्दों से पूरी तरह जोड़ लिया है। छत्तीसगढ़ी सोशल मीडिया ग्रुप्स और डिजिटल कम्युनिटीज में इस पार्टी के नाम का उपयोग करके राज्य की भर्ती परीक्षाओं में होने वाली देरी, बेरोजगारी भत्ते के नियमों और महंगी व्यावसायिक शिक्षा को लेकर मजेदार मीम्स और पोस्ट शेयर किए जा रहे हैं। स्थानीय युवाओं का कहना है कि जब भी वे शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हैं, तो प्रशासन उन्हें अनसुना कर देता है। ऐसे में यह डिजिटल माध्यम अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का एक प्रभावी और शांतिपूर्ण तरीका बन गया है।
युवाओं के बढ़ते असंतोष का बड़ा संकेत, राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं इसे नई चेतना
इस पूरे घटनाक्रम को देश और राज्य के राजनीतिक विश्लेषक बेहद गंभीरता से देख रहे हैं। जानकारों का कहना है कि सोशल मीडिया पर करोड़ों की संख्या में युवाओं का एक व्यंग्यात्मक पेज से जुड़ना यह साफ दर्शाता है कि आज की युवा पीढ़ी के भीतर रोजगार और अपनी समस्याओं को लेकर कितना गहरा असंतोष छिपा हुआ है। पारंपरिक तौर-तरीकों से अलग हटकर युवाओं का यह डिजिटल विरोध आने वाले समय में मुख्यधारा की राजनीति और सरकार की नीतियों को प्रभावित कर सकता है। अब देखना यह होगा कि सोशल मीडिया की यह डिजिटल फौज धरातल पर क्या असर दिखाती है।



