
छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर से चोरी की एक ऐसी वारदात सामने आई है जिसे सुनकर हर कोई दंग है। ढोढीपारा क्षेत्र में नहर पर बना करीब 40 साल पुराना और 60 फीट लंबा लोहे का पुल रातों-रात गायब हो गया। शनिवार सुबह जब स्थानीय लोग हमेशा की तरह नहर पार करने पहुंचे तो वहां पुल का नामोनिशान नहीं था। हैरान-परेशान लोगों ने तुरंत इसकी सूचना वार्ड पार्षद को दी जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। यह पुल दशकों से लोगों के आवागमन का मुख्य सहारा था।
गैस कटर से टुकड़े कर ढो ले गए 10 टन लोहा
पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि चोरों ने इस बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए पूरी तैयारी की थी। करीब 10 टन वजनी इस भारी-भरकम पुल को गैस कटर की मदद से छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा गया। इसके बाद लोहे के इन भारी टुकड़ों को गाड़ियों में भरकर शहर से बाहर ले जाया गया। इतनी बड़ी मशीनरी और गैस कटर चलने के बावजूद आसपास के लोगों को भनक तक नहीं लगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चोरों ने इस पूरी साजिश को कबाड़ के रूप में बेचने के मकसद से अंजाम दिया।
पुलिस ने 5 आरोपियों को दबोचा, 10 अब भी फरार
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत घेराबंदी की और इस मामले में शामिल 15 संदिग्धों की पहचान की। पुलिस ने अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है जिन्होंने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों में लोचन केवट, जयसिंह राजपूत, मोती प्रजापति, सुमित साहू और केशवपुरी गोस्वामी शामिल हैं। हालांकि इस चोरी के मुख्य साजिशकर्ता मुकेश साहू और असलम खान समेत 10 अन्य आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं जिनकी तलाश में टीमें दबिश दे रही हैं।
नहर के भीतर से बरामद हुआ 7 टन लोहा
सीएसईबी पुलिस चौकी की टीम ने आरोपियों की निशानदेही पर कार्रवाई करते हुए नहर के भीतर छिपाकर रखा गया लगभग 7 टन लोहा बरामद कर लिया है। इसके अलावा पुलिस ने वह गाड़ी भी जब्त की है जिसका इस्तेमाल चोरी का माल ढोने के लिए किया गया था। जांच अधिकारी भीमसेन यादव ने बताया कि गिरफ्तार किए गए अधिकांश आरोपी कबाड़ के धंधे से जुड़े हैं और लंबे समय से ऐसी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि बाकी 3 टन लोहा कहां और किसे बेचा गया है।
40 साल पुरानी यादों और आवाजाही पर लगा ब्रेक
वार्ड पार्षद लक्ष्मण श्रीवास के अनुसार यह पुल लगभग 70 फुट लंबा और 5 फुट चौड़ा था। करीब चार दशक पहले बना यह ढांचा स्थानीय निवासियों के लिए एक अहम कड़ी था। पुल के गायब होने से अब लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोग अब मजबूरी में काफी दूर स्थित कंक्रीट पुल का उपयोग कर रहे हैं। इस घटना ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था और कबाड़ कारोबारियों के बढ़ते दुस्साहस पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कबाड़ माफिया के कनेक्शन की हो रही जांच
एडिशनल एसपी लखन पटले ने बताया कि फरार आरोपियों की तलाश के लिए साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें बनाई गई हैं। पुलिस को शक है कि इस चोरी के पीछे कोई संगठित गिरोह काम कर रहा है जो सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाता है। पकड़े गए आरोपियों के पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। प्रशासन ने शहर के सभी कबाड़ केंद्रों को कड़ी चेतावनी दी है कि वे चोरी का माल न खरीदें अन्यथा उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



