
Dhamtari Bharatmala Project Scam Sivnikala: छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना एक बार फिर बड़े विवादों के घेरे में आ गई है. राज्य में इस प्रोजेक्ट से जुड़े जमीनों के मुआवजे को लेकर पहले भी कई शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन अब धमतरी जिले के सिवनीकला गांव से एक नया और बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है. ग्रामीणों का आरोप है कि इस गांव में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई जमीनों के सरकारी रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया. फर्जी नामांतरण और अवैध बंटवारे के जरिए करीब 35 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि का बंदरबांट किया गया है. इस कथित वित्तीय गड़बड़ी से नाराज ग्रामीणों ने अब सीधे प्रवर्तन निदेशालय (ED) रायपुर को आवेदन देकर मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है.
18 खसरों को कागजों में बांटकर बना दिया 90 हिस्से, ऐसे हुआ खेल
शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि सिवनीकला गांव की बेशकीमती जमीनों को हथियाने और ज्यादा से ज्यादा सरकारी मुआवजा वसूलने के लिए कागजों पर एक अनोखा खेल खेला गया. शुरुआती जांच और दस्तावेजों के मुताबिक गांव के मूल 17 से 18 खसरा नंबरों को राजस्व रिकॉर्ड में अवैध तरीके से विभाजित कर दिया गया. देखते ही देखते इन चंद खसरों को करीब 90 अलग-अलग टुकड़ों में बदल दिया गया. ऐसा इसलिए किया गया ताकि कागजों पर ज्यादा से ज्यादा लोगों को जमीन का मालिक या लाभार्थी दिखाया जा सके और सरकार से मिलने वाली मोटी रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराया जा सके.

2019 के मूल भू-अभिलेख और वर्तमान दस्तावेजों में सामने आईं भारी गड़बड़ियां
ग्रामीणों का दावा है कि साल 2019 में जब भारतमाला परियोजना के लिए पहली बार भूमि अधिग्रहण का आधिकारिक प्रकाशन किया गया था, तब जमीनों का रिकॉर्ड बिल्कुल अलग था. इसके बाद जैसे ही मुआवजे की राशि तय होने का वक्त आया, भू-अभिलेखों में पिछले दरवाजे से बदलाव शुरू हो गए. प्रकाशन के बाद नियमों को ताक पर रखकर जमीनों का नामांतरण और नए सिरे से बंटवारा दर्ज किया गया. शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अगर साल 2019 के मूल रिकॉर्ड और मुआवजा वितरण के समय के दस्तावेजों का स्वतंत्र मिलान कराया जाए, तो पूरा फर्जीवाड़ा साफ तौर पर जनता के सामने आ जाएगा.
बिना प्रशासनिक मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर रिकॉर्ड बदलना मुमकिन नहीं
इस पूरे कथित घोटाले को लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है. ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि हल्के के पटवारी, जमीनों के डायवर्सन से जुड़े अधिकारियों और जिला स्तर पर गठित की गई विशेष जांच टीम की मिलीभगत के बिना इतने बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम देना किसी भी आम आदमी के बस की बात नहीं थी. कागजों पर जमीनों के टुकड़े होते रहे और जिम्मेदार दफ्तरों में बैठे अफसर आंखें मूंदे रहे. हालांकि, इस गंभीर शिकायत के बाद भी अभी तक धमतरी जिला प्रशासन या संबंधित राजस्व विभाग के किसी भी वरिष्ठ अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है.

वास्तविक जमीन मालिकों के अधिकारों को कुचलकर चहेतों को पहुंचाया फायदा
इस कथित मुआवजे के खेल का सबसे दुखद पहलू यह है कि जिन स्थानीय किसानों की पैतृक जमीनें इस सड़क निर्माण के लिए ली गईं, उन्हें कौड़ियों के भाव थमा दिए गए या फिर उन्हें प्रक्रिया से ही बाहर कर दिया गया. असली भूमि स्वामियों के अधिकारों और उनकी अज्ञानता का फायदा उठाकर भू-माफियाओं और रसूखदारों ने अपने चहेतों के नाम कागजों पर दर्ज करवा दिए. वास्तविक किसानों का कहना है कि उनके साथ न्याय होना जरूरी है क्योंकि उन्होंने देश के विकास के लिए अपनी उपजाऊ जमीनें दी थीं, न कि भ्रष्ट अधिकारियों की तिजोरियां भरने के लिए.
केंद्रीय एजेंसी ईडी की एंट्री से मामले के बड़े सिंडिकेट का हो सकता है पर्दाफाश
मामले की गंभीरता और करोड़ों रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन को देखते हुए ग्रामीणों ने इस बार स्थानीय स्तर पर शिकायत करने के बजाय सीधे केंद्रीय जांच एजेंसी का दरवाजा खटखटाया है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंपे गए आवेदन में साफ कहा गया है कि यह केवल एक गांव का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा अंतरजिला सिंडिकेट काम कर रहा है. ग्रामीणों का मानना है कि चूंकि मामला सीधे तौर पर सरकारी धन के गबन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है, इसलिए ईडी की निष्पक्ष और कड़क जांच से ही इस पूरे नेटवर्क के आकाओं को बेनकाब किया जा सकेगा.
छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत उठ चुके हैं सवाल
धमतरी के सिवनीकला गांव से आई यह नई शिकायत छत्तीसगढ़ में चल रहे भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत होने वाले भूमि अधिग्रहण की पारदर्शिता पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है. इससे पहले भी प्रदेश के अलग-अलग जिलों से मुआवजे में धांधली, गलत मूल्यांकन और फर्जी हितग्राही बनकर पैसे निकालने के मामले सामने आ चुके हैं. लगातार आ रही इन शिकायतों के बाद अब राज्य सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय भी बैकफुट पर है. कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में धमतरी सहित कई अन्य प्रभावित क्षेत्रों में मुआवजा वितरण की फाइलों को दोबारा खोला जा सकता है.
सही जांच न होने पर सरकारी खजाने के साथ किसानों के भरोसे को भी पहुंचेगी ठेस
स्थानीय किसान नेताओं का कहना है कि यदि इस शिकायत को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया या स्थानीय स्तर पर लीपापोती की कोशिश की गई, तो इसका बहुत गलत संदेश जाएगा. इससे न केवल देश के ईमानदार करदाताओं के पैसे की बर्बादी होगी, बल्कि उन गरीब किसानों का भी सरकारी तंत्र से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा जिनकी आजीविका का एकमात्र साधन उनकी जमीनें थीं. ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि वे इस लड़ाई को बीच में नहीं छोड़ेंगे और पारदर्शी जांच व दोषियों को जेल भेजने की मांग को लेकर हर स्तर पर प्रयास जारी रखेंगे.
आने वाले दिनों में धमतरी कलेक्ट्रेट और राजस्व विभाग में मचेगी भारी खलबली
12 जून 2026 को ईडी दफ्तर में शिकायत दर्ज होने के बाद से ही धमतरी के प्रशासनिक हल्कों में अंदरूनी बेचैनी साफ देखी जा रही है. इस मामले के सामने आने के बाद कलेक्ट्रेट के भू-अभिलेख शाखा और नगरीय निकायों के उन बाबुओं की धड़कनें बढ़ गई हैं, जिनके कार्यकाल के दौरान इन जमीनों की फाइलों को आगे बढ़ाया गया था. कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि ईडी ने इस मामले में शुरुआती इनपुट के आधार पर मामला दर्ज कर लिया, तो धमतरी राजस्व विभाग के कई बड़े चेहरों को आने वाले दिनों में रायपुर दफ्तर के चक्कर काटने पड़ सकते हैं.
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