Dhanteras 2026: क्यों मनाया जाता है धनतेरस, रात क्यों जलाया जाता है यमराज के नाम का दीपक? जानिए इसके पीछे की पौराणिक कथा

Dhanteras 2026 Yama Deepam Significance: दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व की शुरुआत धनतेरस के पावन त्योहार से होती है। हिंदू धर्म में धनतेरस का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। इस दिन मां लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर और आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि की विधि-विधान से पूजा की जाती है। लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोने-चांदी के आभूषण, नए बर्तन और अन्य शुभ वस्तुएं खरीदते हैं। इस सबके अलावा धनतेरस की रात को यमराज के निमित्त दीपक जलाने की पुरानी परंपरा है, जिसे यम दीपदान कहा जाता है।

समुद्र मंथन से जुड़ा है धनतेरस के पर्व का इतिहास

Dhanteras Katha And Religious Importance: धार्मिक कथाओं के अनुसार धनतेरस का पर्व मुख्य रूप से समुद्र मंथन की घटना से जुड़ा हुआ है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था, तब भगवान धन्वंतरि हाथों में अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को चिकित्सा और आयुर्वेद का देवता माना जाता है। उनके हाथ में अमृत कलश होने की वजह से ही इस दिन नए बर्तन और धातु की चीजें खरीदने की परंपरा की शुरुआत हुई थी।

बारह साल तक किसान के घर रहने की पौराणिक कथा

Dhanteras Puja Vidhi And Katha 2026: धनतेरस से जुड़ी एक अन्य कथा के अनुसार एक बार माता लक्ष्मी को श्राप के कारण बारह वर्षों तक एक साधारण किसान के घर रहना पड़ा था। इस दौरान किसान के जीवन में धन और समृद्धि की कोई कमी नहीं रही। जब वह अवधि पूरी हुई और माता लक्ष्मी के जाने का समय आया, तो किसान ने उन्हें विदा करने से मना कर दिया। तब देवी लक्ष्मी ने उसे कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन घर की सफाई कर दीप जलाने और कलश की पूजा करने का उपाय बताया, जिससे उसके घर में हमेशा बरकत बनी रही।

यम दीपदान की परंपरा

धनतेरस पर यमराज के नाम का दीपक जलाने के पीछे एक बेहद प्रचलित कथा है। एक बार हंस नामक राजा के पुत्र की कुंडली में विवाह के चार दिन बाद मृत्यु का योग था। विवाह के पश्चात जब उसकी अकाल मृत्यु हुई, तो उसकी पत्नी का विलाप देखकर एक यमदूत का मन भी पसीज गया। उसने यमराज से अकाल मृत्यु से बचने का उपाय पूछा। तब यमराज ने बताया कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन जो व्यक्ति विधि से पूजा कर यमराज के नाम का दीपक जलाता है, उसके परिवार पर कभी अकाल मृत्यु का संकट नहीं आता है।

किन देवी-देवताओं की होती है पूजा

Dhanteras Yama Deepdan Niyam: धनतेरस के दिन तीन मुख्य देवताओं की पूजा का विधान है। इनमें स्वास्थ्य और आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि, धन की देवी माता लक्ष्मी और धन के रक्षक भगवान कुबेर शामिल हैं। इस दिन लोग अपने घरों के पूजा स्थल के साथ-साथ मुख्य द्वार पर भी दीपक जलाते हैं। मान्यता है कि इन देवी-देवताओं की कृपा से घर में सालभर सुख, शांति और आर्थिक संपन्नता बनी रहती है।

सोना-चांदी और बर्तन खरीदने की परंपरा का धार्मिक महत्व

धनतेरस के दिन लोग अपनी क्षमता के अनुसार सोना, चांदी, पीतल या तांबे के बर्तन और अन्य उपयोगी सामान खरीदते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन घर में नई वस्तुएं लाने से सौभाग्य में वृद्धि होती है। हालांकि यह पूरी तरह व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है और कोई अनिवार्य नियम नहीं है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य परिवार में खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना होता है।

स्वास्थ्य, लंबी उम्र और समृद्धि की कामना का पर्व है धनतेरस

धनतेरस का यह पर्व केवल धन-दौलत अर्जित करने का साधन नहीं है, बल्कि यह अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की लंबी उम्र की कामना का दिन भी है। इस त्योहार का संदेश हमें यह सिखाता है कि स्वस्थ शरीर और सकारात्मक सोच ही मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी होती है। यही कारण है कि देशभर में लोग इस दिन को पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हैं।

यमराज के निमित्त किस तरह जलाया जाता है दीपक

धनतेरस की शाम को मुख्य पूजा के बाद घर के बाहर या दक्षिण दिशा की ओर मुख करके आटे का चौमुखी दीपक जलाया जाता है, जिसे यम का दीया कहा जाता है। इस दीपक में सरसों का तेल डाला जाता है और कुछ लोग इसमें पुराने सिक्के या कौड़ी भी रखते हैं। ऐसी मान्यता है कि यह दीपक जलाने से घर के सदस्यों की अकाल मृत्यु से रक्षा होती है और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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