
धमतरी नगर निगम में पिछले कुछ समय से चल रही खरीदी की प्रक्रियाओं पर भ्रष्टाचार के काले बादल मंडरा रहे हैं। पार्षदों द्वारा घटिया सामग्री की सप्लाई और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों के बाद शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। 24 मार्च को रायपुर से दो विशेष जांच टीमें धमतरी पहुंचीं, जिन्होंने निगम परिसर में धूल फांक रहे 80 नग नए रिक्शों की बारीकी से जांच की। इसके अलावा, वाटर ट्रीटमेंट और सिवरेज प्लांट में हुए निर्माण कार्यों का भी जायजा लिया गया। इस जांच के बाद निगम गलियारे में हड़कंप मच गया है, क्योंकि करोड़ों रुपये के भुगतान को लेकर अब अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
पीली रिक्शों की खुली पोल: टेप लेकर पहुंची टीम ने परखी गुणवत्ता
नगर निगम परिसर में खड़े 80 नग पीले रंग के रिक्शों की गुणवत्ता को लेकर पार्षदों ने गंभीर आरोप लगाए थे। रायपुर से पहुंचे नगरीय निकाय विभाग के उपसंचालक सूर्यकांत श्रीवास्तव और उनकी टीम ने मौके पर पहुंचकर रिक्शों की लंबाई, चौड़ाई और लोहे की चादर की मोटाई को टेप से नापकर रिपोर्ट तैयार की है। शिकायत है कि अंबिकापुर की एजेंसी ‘मां महामाया इंटरप्राइजेस’ ने जो रिक्शे सप्लाई किए हैं, उनके टायर, गेज और बेयरिंग निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं। एमआईसी की बैठक में भी इन घटिया रिक्शों को वापस करने का निर्णय लिया जा चुका है, लेकिन ये अब भी निगम की शोभा बढ़ा रहे हैं।
आचार संहिता के दौरान खेल: टेंडर से लेकर वर्क ऑर्डर तक का सफर
इन रिक्शों की खरीदी की कहानी काफी दिलचस्प है। कांग्रेस शासनकाल में 20 दिसंबर 2024 को इसका टेंडर बुलाया गया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आचार संहिता के दौरान 25 मार्च 2025 को आनन-फानन में कार्य आदेश जारी कर दिया गया। पार्षदों का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर घटिया सामग्री की सप्लाई ली गई। जांच टीम अब इस बात की भी फाइलें खंगाल रही है कि आखिर किस दबाव या जल्दबाजी में मानकों की अनदेखी कर वर्क ऑर्डर जारी किया गया और इसमें किन अधिकारियों की रजामंदी शामिल थी।
टिप्पर खरीदी में ‘बंदरबांट’: 25 लाख का सामान 50 लाख में?
रिक्शों के अलावा दो नग टिप्पर की खरीदी ने भी भ्रष्टाचार की चर्चाओं को हवा दे दी है। उपनेता प्रतिपक्ष विशु देवांगन का सीधा आरोप है कि जिन दो टिप्परों के लिए सप्लायर को 50 लाख रुपये का भुगतान किया गया है, उनकी वास्तविक कीमत कहीं कम है। अन्य कोटेशन के अनुसार एक टिप्पर की दर करीब 12 लाख 66 हजार रुपये है, यानी दो टिप्पर 25 लाख रुपये के आसपास होने चाहिए थे। लेकिन निगम ने दोगुने दाम पर भुगतान कर दिया। इस ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे के बीच हुई भारी-भरकम राशि की हेराफेरी ने कांग्रेसी पार्षदों को भी विरोध में खड़ा कर दिया है।
बेलिंग मशीन और भारी भुगतान: जांच के घेरे में वित्तीय फैसले
भ्रष्टाचार की फेहरिस्त यहीं खत्म नहीं होती। 8 लाख 20 हजार रुपये की लागत से खरीदी गई बेलिंग मशीन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। पार्षदों का कहना है कि मशीनों की खरीदी और उनके भुगतान की प्रक्रिया में पारदर्शिता का पूरी तरह अभाव रहा है। बिना उचित सत्यापन के सप्लायरों को भुगतान करना अधिकारियों की मंशा पर शक पैदा करता है। जांच टीम ने इन मशीनों के खरीद संबंधी दस्तावेजों को जब्त कर लिया है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या भुगतान से पहले भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया गया था या नहीं।
सिवरेज और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट: करोड़ों के काम में भारी खामियां
संयुक्त संचालक सुदेश सुंदरानी के नेतृत्व वाली दूसरी टीम ने मुजगहन स्थित सिवरेज प्लांट और मुख्य नहर के पास बने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का बारीकी से निरीक्षण किया। जल विभाग के प्रभारी अखिलेश सोनकर ने इस प्लांट के निर्माण को लेकर 16 बिंदुओं पर गंभीर शिकायतें की थीं। आरोप है कि प्लांट में तकनीकी खामियां और निर्माण में अनियमितता होने के बावजूद ठेकेदार को 2 करोड़ 33 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। टीम ने मौके पर जाकर देखा कि क्या वाकई प्लांट सुचारू रूप से काम करने की स्थिति में है या जनता का पैसा पानी में बहाया गया है।
क्या गिरेगी गाज? रिपोर्ट के आधार पर होगी अगली कार्रवाई
धमतरी पहुंची जांच टीमों ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली है और इसे शासन को सौंपने की तैयारी है। नगरीय निकाय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि मानकों में कमी और वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है, तो संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के साथ-साथ दोषी अधिकारियों पर भी गाज गिरनी तय है। फिलहाल, निगम में सन्नाटा पसरा है और सभी की नजरें रायपुर से आने वाले अगले आदेश पर टिकी हैं। जनता अब यह देख रही है कि भ्रष्टाचार के इन आरोपों पर सरकार कितनी सख्ती से कदम उठाती है।
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