
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में ‘नक्सल मुक्त भारत’ के मुद्दे पर चर्चा के दौरान विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट किया कि बस्तर अब लाल आतंक की छाया से बाहर निकलकर विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है। शाह ने सदन में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि दशकों तक भोले-भाले आदिवासियों को अंधेरे में रखा गया और उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया। गृह मंत्री ने कांग्रेस की पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी आदिवासी क्षेत्रों तक बिजली, सड़क और मोबाइल टावर क्यों नहीं पहुंच पाए थे।
कांग्रेस के 60 साल पर सवाल: आदिवासियों की अनदेखी का लगाया आरोप
सदन को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कांग्रेस से सीधा सवाल किया कि 75 साल में से 60 साल देश पर राज करने के बावजूद आदिवासी समाज विकास से दूर क्यों रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने आदिवासियों के घरों तक स्कूल, अस्पताल और संचार के साधन पहुंचने ही नहीं दिए। शाह ने कहा कि जो लोग आज सरकार से हिसाब मांग रहे हैं, उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान हुई अनदेखी के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र की वर्तमान सरकार आदिवासियों के हक और उनके सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह समर्पित है।
हथियार या संविधान: सशस्त्र आंदोलन की वकालत करने वालों को घेरा
गृह मंत्री ने उन लोगों को भी आड़े हाथों लिया जो अक्सर सशस्त्र आंदोलनों का बचाव करते नजर आते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि लोकतांत्रिक देश में क्या संविधान का सम्मान करना अनिवार्य नहीं है। शाह ने कहा कि यदि कहीं कोई अन्याय होता है, तो उसके समाधान के लिए अदालतें, विधानसभाएं और जिला परिषदें बनी हुई हैं। कानून हाथ में लेने और हिंसा का रास्ता अख्तियार करने का समर्थन किसी भी सभ्य समाज में नहीं किया जा सकता। बस्तर के लोगों को अब डराकर नहीं रखा जा सकता क्योंकि वहां अब विकास की रोशनी पहुंच रही है।
विचारधारा पर प्रहार: माओवाद को बताया सत्ता हथियाने का जरिया
चर्चा के दौरान शाह ने स्पष्ट रूप से कहा कि नक्सलवाद का विकास या समाज सेवा से कोई लेना-देना नहीं है। उनके मुताबिक, यह विचारधारा केवल हथियारों के बल पर सत्ता कब्जाने के लिए फैलाई गई थी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि उस दौर में इस विचारधारा को मौन स्वीकृति मिलने के कारण ही छत्तीसगढ़ समेत 12 राज्यों में ‘रेड कॉरिडोर’ का विस्तार हुआ। इसी वजह से देश के सैकड़ों युवाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी और विकास के पहिये ठप हो गए।
लाल आतंक का अंत: बस्तर में विकास के नए युग की शुरुआत
गृह मंत्री ने दावा किया कि अब बस्तर क्षेत्र से नक्सलवाद की काली छाया हट चुकी है और वहां के लोग शांति व प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं। सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के कारण नक्सली कैडर कमजोर हुआ है और सुरक्षा बलों ने रणनीतिक बढ़त हासिल की है। शाह ने आश्वासन दिया कि भारत को बहुत जल्द पूरी तरह नक्सल मुक्त कर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य केवल बंदूकें शांत करना नहीं, बल्कि उन दुर्गम इलाकों तक स्कूल, सड़क और रोजगार पहुंचाना है जो दशकों से उपेक्षित रहे थे।
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