
छत्तीसगढ़ के बड़े शहरों में सार्वजनिक परिवहन को प्रदूषण मुक्त और आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और कोरबा में कुल 240 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का मेगा प्लान तैयार किया गया है। योजना के मुताबिक, राजधानी रायपुर की सड़कों पर सबसे ज्यादा 100 बसें उतरेंगी, वहीं बिलासपुर और दुर्ग-भिलाई को 50-50 और कोरबा को 20 बसें आवंटित की गई हैं। हालांकि, कागजों पर योजना तैयार है और जमीन पर बुनियादी ढांचे का काम भी चल रहा है, लेकिन आम जनता को अभी भी इन हाईटेक बसों के सड़क पर उतरने का बेसब्री से इंतजार है।
इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार पर बसों का इंतजार: डिपो और चार्जिंग स्टेशन पर काम जारी
शहरी परिवहन को मजबूत करने के लिए चारों चिह्नित शहरों में बसों के रखरखाव के लिए डिपो और चार्जिंग पॉइंट बनाने का काम तेजी से किया जा रहा है। शासन ने जिला अर्बन पब्लिक सर्विस सोसायटी (UPSS) को इस पूरी योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी है। निर्देश दिए गए हैं कि जब तक केंद्र सरकार से बसों की डिलीवरी मिलती है, तब तक सिविल डिपो और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर का काम शत-प्रतिशत पूरा कर लिया जाए। इसके बावजूद, वास्तविकता यह है कि तीन साल से चल रही इस कवायद के बाद भी अब तक एक भी बस छत्तीसगढ़ नहीं पहुंची है।
विधानसभा में उठा मुद्दा: मंत्री ने बताया क्यों हो रही है देरी
हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने इन बसों के संचालन में हो रही देरी पर विभागीय मंत्री अरुण साव से सवाल पूछा था। मंत्री ने अपने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की ओर से तैयारियां पूरी हैं। एजेंसी नियुक्त की जा चुकी है और डिपो निर्माण का काम भी अंतिम दौर में है। देरी का मुख्य कारण केंद्र सरकार से बसों की आपूर्ति न मिल पाना है। जैसे ही भारत सरकार से बसों की खेप प्राप्त होगी, संबंधित शहरों में इनका परिचालन तुरंत शुरू कर दिया जाएगा।
बजट में हर साल प्रावधान: 2025 से चल रही है कवायद
छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक बसें चलाने की प्रक्रिया पिछले तीन वर्षों से फाइलों में घूम रही है। साल 2025 से ही हर बार राज्य के बजट में इन बसों के लिए विशेष राशि का प्रावधान रखा जाता है। केंद्र सरकार की ‘पीएम ई-बस सेवा’ के तहत इन बसों को चलाया जाना है, जिसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन कम करना और सस्ती परिवहन सेवा उपलब्ध कराना है। फिलहाल रायपुर जैसे भीड़भाड़ वाले शहरों में पुरानी बसों के भरोसे चल रहे यात्री नई और आरामदायक इलेक्ट्रिक बसों की राह देख रहे हैं।
यूपीएसएस संभालेगी कमान: संचालन के लिए नई व्यवस्था तैयार
ई-बसों के सुचारू संचालन के लिए जिला स्तर पर गठित यूपीएसएस (UPSS) ही मुख्य एजेंसी होगी। योजना के अनुसार, डिपो का निर्माण पूरा होते ही बसों के रूट तय किए जाएंगे और ड्राइवरों व तकनीकी स्टाफ की भर्ती की जाएगी। इन बसों के आने से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि ध्वनि और वायु प्रदूषण में भी भारी कमी आएगी। अधिकारियों का कहना है कि केंद्र से बसों की पहली खेप मिलते ही प्राथमिकता के आधार पर रायपुर और बिलासपुर में ट्रायल रन शुरू किया जा सकता है, जिससे यात्रियों को राहत मिलेगी।



