
रायपुर: CG Ganesh: गणेश पर्व की शुरुआत हो चुकी है और देशभर में भगवान गणेश की पूजा अर्चना का दौर चल रहा है। छत्तीसगढ़ में भी श्रद्धालु पूरे उत्साह से बप्पा की आराधना में जुटे हैं। इसी बीच हम आपको प्रदेश के दो ऐसे अनोखे गणेश मंदिरों के बारे में बता रहे हैं, जो अपनी ऐतिहासिक, धार्मिक और स्थापत्य विशेषताओं के लिए दूर-दराज के श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।
ढोलकल गणेश: पहाड़ी की चोटी पर बसी अद्भुत प्रतिमा
Dholkal Ganesh: दंतेवाड़ा जिले की एक दुर्गम पहाड़ी पर स्थित है ढोलकल गणेश प्रतिमा, जो करीब 3385 फीट की ऊंचाई पर है। ये मूर्ति घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच एक ऐसी जगह पर स्थित है, जहां तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को ट्रेकिंग करनी पड़ती है।

Barsur Temples: इस प्रतिमा की खोज कुछ साल पहले ट्रैकिंग पर निकले युवाओं ने की थी और सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल होने के बाद यह स्थान प्रसिद्ध हो गया। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस मूर्ति की स्थापना 1023 ई. में छिंदक नागवंशी शासक कश्यप ने की थी।
यह प्रतिमा काले पत्थर से बनी है और भगवान गणेश को ललितासन मुद्रा में दिखाया गया है। इसकी ऊंचाई 36 इंच और मोटाई 19 इंच है। यह मूर्ति दक्षिण भारतीय स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है।
Dholkal Hill Temple: ढोलकल की यह चोटी केवल धार्मिक महत्व नहीं रखती, बल्कि यहां की हरी-भरी घाटियां और जैव विविधता भी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। इसके पास स्थित नंदीराज चोटी और सूर्य मंदिर जैसे स्थान भी लोगों की आस्था और जिज्ञासा का केंद्र हैं।

बारसूर की जुड़वां गणेश प्रतिमा: एक ही पत्थर से बनी दो मूर्तियां
Barsur Twin Ganesh: दंतेवाड़ा जिले का बारसूर गांव अपनी ऐतिहासिकता और मंदिरों के लिए जाना जाता है। इसे देवनगरी भी कहा जाता है, क्योंकि यहां 147 प्राचीन मंदिर मौजूद हैं। इन्हीं में एक खास आकर्षण है गणेश की जुड़वां प्रतिमा, जिसे एक ही पत्थर से तराशा गया है।

इस मूर्ति को 11वीं शताब्दी में बनाया गया था। इसकी एक प्रतिमा की ऊंचाई 7.5 फीट और दूसरी की 5.5 फीट है। खास बात यह है कि इन दोनों मूर्तियों को चट्टान को बिना तोड़े या जोड़े तराशा गया है।
यह मूर्ति उस समय की शिल्पकला और धार्मिक आस्था का अद्भुत उदाहरण है। जुड़वां गणेश प्रतिमा आज न सिर्फ स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए भी आस्था और आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

Ganesh Parv 2025 के मौके पर अगर आप भगवान गणेश के दर्शन के साथ इतिहास और शिल्पकला का अनुभव भी करना चाहते हैं, तो छत्तीसगढ़ के ये दोनों स्थान आपकी यात्रा का हिस्सा जरूर बनने चाहिए।
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