
उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में गरीबों के निवाले पर डाका डालने का एक बड़ा मामला सामने आया है। लखनपुर विकासखंड के ग्राम कटिंदा में राशन दुकान संचालकों ने मिलकर लाखों रुपये का खाद्यान्न गायब कर दिया। ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद जब खाद्य विभाग ने दुकान का भौतिक सत्यापन किया, तो स्टॉक में भारी अंतर पाया गया। जांच में पता चला कि करीब 15 लाख 72 हजार रुपये का राशन रिकॉर्ड से नदारद है। इस धांधली के उजागर होने के बाद खाद्य विभाग की शिकायत पर पुलिस ने स्व सहायता समूह के पदाधिकारियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
ग्रामीणों की शिकायत पर खुला राज: खाली मिले राशन के गोदाम
कटिंदा गांव के निवासी लंबे समय से राशन वितरण में हो रही अनियमितताओं और दुकान संचालकों के मनमाने व्यवहार से परेशान थे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्हें समय पर राशन नहीं मिल रहा था और स्टॉक की जानकारी भी छिपाई जा रही थी। शिकायत मिलने पर खाद्य निरीक्षक सतपाल सिंह कंवर ने अपनी टीम के साथ राशन दुकान का औचक निरीक्षण किया। जब सरकारी रजिस्टर और गोदाम में रखे सामान का मिलान किया गया, तो वहां से भारी मात्रा में चावल, दाल और शक्कर गायब मिली। इस खुलासे के बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया।
गायब राशन का गणित: चावल से लेकर नमक तक का हुआ गबन
खाद्य विभाग की जांच रिपोर्ट में गबन के आंकड़ों ने अधिकारियों को भी चौंका दिया है। जांच में जो सामान गायब मिला, उसकी सूची काफी लंबी है।
- चावल: लगभग 380.53 क्विंटल चावल का कोई अता-पता नहीं है।
- शक्कर: 12.95 क्विंटल शक्कर का स्टॉक कम पाया गया।
- दाल और नमक: 5.5 क्विंटल चना दाल और 23.64 क्विंटल नमक भी डकार लिया गया।इन सभी वस्तुओं की कुल बाजार कीमत करीब 15 लाख 72 हजार रुपये आंकी गई है, जिसे संचालकों ने निजी फायदे के लिए बेच दिया या कहीं और खपा दिया।
सरपंच पति और समूह अध्यक्ष के खिलाफ केस: पुलिस ने कसा शिकंजा
इस राशन दुकान का संचालन ‘गणेश स्वयं सहायता समूह’ द्वारा किया जा रहा था। जांच में सामने आया कि दुकान की वास्तविक कमान सरपंच के पति कुदरत बहाल सिंह के हाथों में थी। खाद्य निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर लखनपुर पुलिस ने कुदरत बहाल सिंह, समूह की अध्यक्ष कविता सिंह और उपाध्यक्ष दिलसाय के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पद का दुरुपयोग: समूह की आड़ में चल रहा था खेल
ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच पति के रसूख के कारण समूह के पदाधिकारी बेखौफ होकर राशन की कालाबाजारी कर रहे थे। स्व सहायता समूहों को राशन दुकान का आवंटन इसलिए किया जाता है ताकि स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता बनी रहे, लेकिन यहां की स्थिति ठीक उलट निकली। समूह के जिम्मेदार लोग ही गरीबों के हक का अनाज हड़प गए। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस घोटाले में कुछ अन्य विभागीय कर्मचारी या बिचौलिए भी शामिल थे।
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई: जेल की हवा खाएंगे आरोपी
खाद्य विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दर्ज मामले में आरोपियों को कड़ी सजा और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। विभाग का कहना है कि राशन वितरण प्रणाली में ऐसी गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों से गबन की गई राशि की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
पारदर्शी वितरण की चुनौती: कलेक्टर के निर्देश पर सख्त हुई निगरानी
सरगुजा जिले में राशन घोटाले के इस मामले के बाद प्रशासन अब अन्य दुकानों की भी बारीकी से जांच करने की तैयारी में है। कलेक्टर ने सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी राशन दुकानों पर स्टॉक का बोर्ड लगाना अनिवार्य है और वितरण के समय बायोमेट्रिक सत्यापन में कोई कोताही न बरती जाए। कटिंदा की इस घटना ने एक बार फिर सरकारी राशन वितरण प्रणाली में मौजूद कमियों और निगरानी की जरूरत को उजागर कर दिया है। ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द नए समूह को दुकान की जिम्मेदारी दी जाए ताकि उन्हें राशन मिल सके।



