
Iran US Hormuz Strait Crisis: ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव ने अब पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के खतरे के करीब धकेल दिया है। तेहरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन माने जाने वाले ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पूरी तरह बंद करने का ऐलान कर दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका समुद्री रास्तों पर लगाई गई अपनी पाबंदियां नहीं हटाता, तब तक वह इस रास्ते से किसी भी जहाज को गुजरने नहीं देगा। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल की आशंका जताई जा रही है और वैश्विक व्यापारिक संगठनों में हड़कंप मच गया है।
ट्रंप का अल्टीमेटम: झुकने को तैयार नहीं तो भुगतना होगा अंजाम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस कदम पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करने का नया समझौता नहीं करता, तब तक अमेरिका अपनी आर्थिक और समुद्री नाकाबंदी जारी रखेगा। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर बुधवार तक ईरान अपनी जिद से पीछे नहीं हटा, तो अमेरिकी वायुसेना एक बार फिर भीषण हवाई हमले शुरू कर देगी। ट्रंप ने यह भी संकेत दिए हैं कि इस बार उनके निशाने पर सीधे ईरान के परमाणु ठिकानों के यूरेनियम भंडार होंगे।
बातचीत के रास्ते बंद, तेहरान ने लगाया समुद्री डकैती का आरोप
तनाव के बीच ईरान ने अगले दौर की शांति वार्ता में शामिल होने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में अमेरिकी मौजूदगी को ‘समुद्री डकैती’ करार दिया है। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका जबरन व्यापारिक जहाजों को रोककर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहा है। ईरान ने एक पाकिस्तानी मध्यस्थ के माध्यम से वाशिंगटन को कड़ा संदेश भिजवाया है कि वे फिलहाल किसी भी मेज पर बैठकर चर्चा करने के मूड में नहीं हैं और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए युद्ध को भी तैयार हैं।
होर्मुज स्ट्रेट: 33 किलोमीटर का वह रास्ता जहां फंसी दुनिया की जान
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज महज 33 किलोमीटर चौड़ा एक संकरा समुद्री रास्ता है, लेकिन इसकी अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल यहीं से होकर गुजरता है। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह जलमार्ग बंद होने का मतलब है कि खाड़ी देशों से तेल लेकर निकलने वाले टैंकरों के पहिए थम जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहा, तो विकसित देशों से लेकर विकासशील देशों तक की अर्थव्यवस्थाएं ताश के पत्तों की तरह ढह सकती हैं।
सीजफायर खत्म होने का खतरा, फिर शुरू हो सकती है बमबारी
शुक्रवार को कुछ घंटों के लिए जहाजों को रास्ता देने की बात कहने वाला ईरान अब पूरी तरह पलट गया है। ट्रंप ने इसे धोखेबाजी बताते हुए सीजफायर को खत्म करने की धमकी दी है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने क्षेत्र में अपने बेड़े को अलर्ट पर रखा है। यदि आने वाले 48 घंटों में कूटनीतिक स्तर पर कोई हल नहीं निकला, तो ईरान के बंदरगाहों और सामरिक ठिकानों पर मिसाइल हमलों का नया दौर शुरू हो सकता है। दुनिया भर के देश फिलहाल इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं।
वैश्विक तेल बाजार और भारत पर पड़ने वाला असर
इस संकट का सीधा असर भारत जैसे उन देशों पर पड़ेगा जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं। तेल की सप्लाई रुकने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा। शिपिंग कंपनियों ने पहले ही इस रास्ते से अपने जहाजों को भेजने से मना कर दिया है या भारी रिस्क इंश्योरेंस की मांग कर रही हैं। फिलहाल सारा दारोमदार अमेरिका के अगले कदम और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों की सक्रियता पर टिका है कि वे इस युद्ध को टाल पाते हैं या नहीं।



