
रायपुर नगर निगम गरीब और मध्यम वर्ग के करदाताओं से तो पाई-पाई वसूल लेता है, लेकिन सरकारी बंगलों में रहने वाले मंत्री, विधायक, महापौर और अफसरों से 10 साल से बकाया टैक्स वसूल नहीं पाया है। 1100 से अधिक सरकारी बिल्डिंगों पर सामान्य जल शुल्क, समेकित कर और कचरा उठाने का यूजर चार्ज मिलाकर ₹10 करोड़ का भारी-भरकम टैक्स बकाया है। इसे वसूलने के लिए जोन 4 कमिश्नरी ने मुख्यालय से मार्गदर्शन मांगा है, जिससे साफ होता है कि यहाँ दिया तले अंधेरा वाली स्थिति बनी हुई है।
1100 से ज्यादा सरकारी भवन जोन 4 में, नहीं दिया एक भी पैसा
रायपुर नगर निगम के जोन 4 कमिश्नरी क्षेत्र में सबसे ज्यादा 1100 सरकारी भवन हैं, जिनमें मंत्री, विधायक और वरिष्ठ अफसर रहते हैं। सरकारी बंगले होने के कारण इन पर प्रापर्टी टैक्स तो नहीं लगता, लेकिन सामान्य जलकर शुल्क और यूजर चार्ज की राशि निगम में जमा करनी पड़ती है। हैरानी की बात यह है कि पिछले 10 साल से इन हजारों बंगलों से निगम ने फूटी कौड़ी तक वसूल नहीं की है। 2016-17 में कराए गए जीआईएस सर्वे के दौरान यह बकाया राशि सामने आई थी।
जोन 2 और 3 में भी यही हाल, मैन्युअल सिस्टम में नहीं मिला रिकॉर्ड
जोन 4 के अलावा जोन 3 और जोन 2 क्षेत्र के सरकारी बंगलों में भी टैक्स वसूली की कमोबेश यही स्थिति है। जोन 3 कमिश्नरी क्षेत्र में 1345 सरकारी आवास हैं, जिनमें विधायक, मंत्रियों के बंगले, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग और उद्योग भवन के क्वार्टर्स शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, 2010 से पहले जब निगम में राजस्व वसूली का मैन्युअल सिस्टम था, तब इन बंगलों में वसूली होती थी या नहीं, इसका कोई रिकॉर्ड भी निगम के पास सुरक्षित नहीं है।
आयुक्त और महापौर ने भुगतान करने की बात कही
मामले पर निगम आयुक्त विश्दीप ने बताया कि बकाया टैक्स भुगतान के लिए डिमांड नोट भेजे जा रहे हैं और राजस्व विभाग की तरफ से नगर निगम द्वारा यह कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि उस अवधि में जिसके नाम बंगला आवंटित था, नियम अनुसार उसी व्यक्ति से बकाया कर की वसूली होगी। वहीं, महापौर मीनल चौबे ने कहा कि कोई भी जनप्रतिनिधि हो, उसे उपयोग की गई अवधि का यूजर चार्ज, जल कर और समेकित कर भुगतान करना चाहिए, और वह खुद भी महापौर बंगले का देय कर भुगतान करेंगी।
डिमांड नोट जारी, आवंटन अवधि के व्यक्ति से होगी वसूली
नगर निगम द्वारा जीआईएस सर्वे के बाद डिमांड नोट तैयार कर लिया गया है और निगम मुख्यालय से मार्गदर्शन मांगा गया है, ताकि संबंधित व्यक्ति से बकाया टैक्स की वसूली शुरू की जा सके। यह स्पष्ट किया गया है कि सरकारी आवास होने के कारण प्रापर्टी टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन सामान्य जल कर, समेकित कर और यूजर चार्ज का भुगतान सरकारी आवास आवंटन जिसके नाम से था, उस अधिकारी, जन प्रतिनिधि या कर्मचारी को ही करना होगा।



