VIDEO: रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर का 70% काम पूरा: बंदरों के लिए कैनोपी और हाथियों के लिए बनेंगे ओवरब्रिज, 7 घंटे में पहुंचेगी राजधानी

छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्रप्रदेश के बीच व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती देने वाला रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर तेजी से आकार ले रहा है। 464 किलोमीटर लंबे इस सिक्सलेन एक्सप्रेस-वे का लगभग 70 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। अधिकारियों का अनुमान है कि अगले दो सालों के भीतर यह पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के शुरू होने से छत्तीसगढ़ की समुद्र तट तक पहुंच बेहद आसान हो जाएगी।

वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम

इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी विशेषता इसका पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होना है। एक्सप्रेस-वे का एक बड़ा हिस्सा जंगल से होकर गुजरता है, इसलिए जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जानवरों के प्राकृतिक रास्तों को बाधित नहीं किया गया है। इसके बजाय उनके सुरक्षित आवागमन के लिए कॉरिडोर के ऊपर और नीचे से विशेष रास्ते तैयार किए जा रहे हैं।

मंकी कैनोपी और हाथी ओवरब्रिज की सूची

परियोजना के तहत जानवरों की प्रजातियों के हिसाब से अलग-अलग निर्माण किए जा रहे हैं:

  • 28 मंकी कैनोपी: बंदरों को सड़क पार करने के लिए पेड़ों की ऊंचाई पर 28 विशेष ब्रिज बनाए गए हैं।
  • 8 एलीफेंट ओवरब्रिज: हाथियों के भारी झुंड को सुरक्षित रास्ता देने के लिए 8 विशाल ओवरब्रिज का निर्माण हो रहा है।
  • 19 एनिमल पास-वे: बाघ, भालू और अन्य हिंसक जानवरों के लिए जमीन के नीचे से 19 अलग रास्ते (अंडरपास) बनाए जा रहे हैं।
  • हाईटेक टनल: पहाड़ों को काटकर आधुनिक सुरंगों का निर्माण भी किया जा रहा है ताकि सडक की ढलान और दूरी कम हो सके।

तीन चरणों में निर्माण की वर्तमान स्थिति

कॉरिडोर का निर्माण कार्य तीन मुख्य फेस में बांटा गया है जिसकी प्रगति कुछ इस प्रकार है:

  1. पहला फेस: झांकी से सरगी तक कुल 42 किमी की दूरी में से 40 किमी का काम पूरा हो चुका है।
  2. दूसरा फेस: सरगी से वसनवाही तक 57 किमी का हिस्सा है जिसमें से 40 किमी सड़क तैयार है।
  3. तीसरा फेस: वसनवाही से मरांगपुरी तक 25 किमी का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा है जहां 10 किमी तक काम हो चुका है।

सफर के समय और ईंधन में होगी भारी बचत

वर्तमान में रायपुर से विशाखापट्टनम जाने में करीब 12 से 13 घंटे का समय लगता है। इस इकोनॉमिक कॉरिडोर के शुरू होने के बाद यह दूरी महज 7 घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे न केवल यात्रियों का समय बचेगा बल्कि ईंधन की भी बड़ी बचत होगी। छत्तीसगढ़ के क्षेत्रीय अधिकारी प्रदीप कुमार लाल के अनुसार यह सड़क राज्य के औद्योगिक विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

पिछड़े क्षेत्रों की आर्थिक कनेक्टिविटी में सुधार

इस एक्सप्रेस-वे का लाभ केवल शहरों को ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों को भी मिलेगा। धमतरी, कांकेर, कोंडागांव और बस्तर जैसे जिलों की मुख्य मार्ग से सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों के उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा। यह कॉरिडोर आने वाले समय में दक्षिण भारत और मध्य भारत के बीच व्यापारिक रीढ़ की हड्डी बनेगा।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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