नशे के सौदागरों की अब खैर नहीं: पहली एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन, कमिश्नरेट का बड़ा एक्शन

रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद अपराधियों पर लगाम कसने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी कड़ी में शहर की पहली एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के गठन का बड़ा फैसला लिया गया है। पुलिस कमिश्नर ने सोमवार को इस विशेष टीम को लेकर आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। इस टास्क फोर्स का मुख्य लक्ष्य शहर में पैर पसार रहे नशीली दवाओं के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना और युवाओं को नशे की दलदल से बाहर निकालना है।

बड़े अधिकारियों के हाथों में होगी कमान

नवनियुक्त टास्क फोर्स की कार्यप्रणाली की सीधी जिम्मेदारी अनुभवी पुलिस अधिकारियों को सौंपी गई है। डीसीपी क्राइम स्मृतिक राजनाला खुद इस टीम की हर गतिविधि पर नजर रखेंगे और मॉनिटरिंग करेंगे। वहीं, एसीपी अनुज कुमार को इस पूरी यूनिट का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। यह टीम अब सीधे तौर पर संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी करने और नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों की कमर तोड़ने का काम करेगी।

विशेष निगरानी और त्वरित एक्शन की तैयारी

एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स केवल छापेमारी तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि यह आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर नशा माफियाओं की कड़ी निगरानी भी करेगी। नोडल अधिकारी अनुज कुमार के नेतृत्व में टीम विशेष रूप से उन इलाकों पर ध्यान केंद्रित करेगी जहां ड्रग्स और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री की शिकायतें सबसे अधिक आती हैं। पुलिस की यह यूनिट नारकोटिक्स से जुड़े मामलों में बिना किसी देरी के त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।

बीते साल 445 तस्करों को पहुंचाया गया सलाखों के पीछे

रायपुर पुलिस का नशे के खिलाफ रिकॉर्ड पिछले साल काफी सख्त रहा है। साल 2025 के दौरान चलाए गए विशेष अभियानों में कुल 445 तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इनमें से 287 आरोपी गांजे की तस्करी में शामिल थे जबकि 116 लोग ड्रग्स के अवैध कारोबार से जुड़े थे। पुलिस ने अपनी सक्रियता से शहर में जहर घोलने वाले सैकड़ों अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में सफलता पाई है।

करोड़ों की ड्रग्स जब्त और 13 बड़े गिरोहों का खात्मा

पुलिस की कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक ही सीमित नहीं रही बल्कि भारी मात्रा में मादक पदार्थ भी जब्त किए गए हैं। अब तक कुल 2.81 करोड़ रुपये की कीमत की ड्रग्स पकड़ी गई है जिसमें हेरोइन, अफीम और एमडीएमए जैसे जानलेवा नशीले पदार्थ शामिल हैं। पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से काम करते हुए तस्करी में लगे 13 बड़े ड्रग कार्टेल को भी पूरी तरह खत्म कर दिया है, जिससे तस्करी के बड़े रास्तों पर लगाम लगी है।

कमिश्नरेट प्रणाली से मिलेगी और ज्यादा ताकत

23 जनवरी से रायपुर में लागू हुई पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली ने पुलिस को अतिरिक्त शक्तियां दी हैं। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन इसी नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जानकारों का मानना है कि इस समर्पित टीम के आने से अब पुलिस को विभागीय औपचारिकताओं में समय गंवाए बिना सीधे एक्शन लेने की आजादी मिलेगी। इससे शहर में कानून-व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी और नशा माफियाओं के बीच पुलिस का खौफ और बढ़ेगा।

क्या आप नशे के खिलाफ पुलिस द्वारा जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर या शहर के उन इलाकों की सूची देखना चाहेंगे जहां विशेष निगरानी रखी जा रही है?

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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