
रायपुर: छत्तीसगढ़ में जमीन की नई गाइडलाइन दरों को लेकर विरोध की लहर तेज हो गई है। सरकार ने करीब सात साल के लंबे अंतराल के बाद दरों में बढ़ोतरी की है, लेकिन कई इलाकों में यह इजाफा 1000 फीसदी तक पहुंच गया है। इस भारी वृद्धि के खिलाफ प्रदेशभर से आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं, जिनमें सबसे ज्यादा विरोध रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव जिलों में देखने को मिला है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि गाइडलाइन दरें जमीन की वास्तविक बाजार कीमत से कहीं ज्यादा हो गई हैं, जिससे मध्यम वर्ग के लिए जमीन खरीदना सपना होता जा रहा है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने तो मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर इन नई दरों को तुरंत रोकने की मांग की है।
हाईकोर्ट जाने की तैयारी में कारोबारी: बिना दावा-आपत्ति नियम लागू करने पर सवाल
जमीन के कारोबार से जुड़े बिल्डर्स और व्यापारी इस फैसले के खिलाफ अब कानूनी लड़ाई लड़ने का मन बना चुके हैं। कारोबारियों का आरोप है कि सरकार ने बिना उचित दावा-आपत्ति मंगाए ही नई दरों को आनन-फानन में लागू कर दिया है। इस मुद्दे पर चर्चा के लिए राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा से भी संपर्क किया गया है। व्यापारियों का कहना है कि यदि बुधवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में सरकार दरों में संशोधन या पुनरीक्षण नहीं करती है, तो वे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। कारोबार ठप होने की आशंका के बीच अब सबकी नजरें कैबिनेट के फैसले पर टिकी हैं कि सरकार जनता को कितनी राहत देती है।
कैबिनेट में पुनरीक्षण प्रस्ताव पर चर्चा: रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम पर भी लग सकती है मुहर
बुधवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक छत्तीसगढ़ के लिए काफी अहम होने वाली है। बैठक में जमीन की दरों को कम करने या उनमें सुधार करने के प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा होगी। विभागीय सूत्रों का मानना है कि बढ़ते दबाव को देखते हुए सरकार कुछ संशोधन कर सकती है। इसके साथ ही, राजधानी रायपुर में लंबे समय से प्रतीक्षित पुलिस कमिश्नर प्रणाली (Police Commissioner System) को भी हरी झंडी मिल सकती है। इसके लिए संबंधित एक्ट में जरूरी बदलावों के प्रस्ताव को मंजूरी दी जा सकती है। अगर ऐसा होता है, तो नए साल में रायपुर की सुरक्षा व्यवस्था का ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा और पुलिस के पास अधिक कानूनी अधिकार होंगे।



