
छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के खाली पड़े 2300 पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर डीएड प्रशिक्षित उम्मीदवारों का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। आमरण अनशन अब 70वें दिन में प्रवेश कर चुका है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मेरिट लिस्ट में नाम होने और अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद सरकार उन्हें ज्वाइनिंग नहीं दे रही है। अपनी मांगों को लेकर वे राजधानी में डटे हुए हैं और अब यह मामला सड़कों से निकलकर विधानसभा की दहलीज तक पहुंच गया है।
विधानसभा के बाहर हिरासत और पुलिसिया कार्रवाई
25 फरवरी को जब विधानसभा का सत्र चल रहा था, तब अपनी मांगों को लेकर कुछ अभ्यर्थी सदन की कार्यवाही देखने पहुंचे थे। अभ्यर्थियों का दावा है कि वे वैध पास और पुलिस प्रशासन को सूचना देकर वहां गए थे। हालांकि, विधानसभा गेट नंबर 3 के पास से पुलिस ने महिलाओं समेत 6 लोगों को हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने उन पर तोड़फोड़ और पेट्रोल फेंकने जैसी संगीन धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। बाद में उन्हें एसडीएम दफ्तर ले जाकर आंदोलन खत्म करने का दबाव बनाया गया और मुचलके पर रिहा किया गया।
जेल जाने को तैयार, पर हक से समझौता नहीं
आंदोलनकारियों का कहना है कि वे जेल की कोठरी से नहीं डरते, लेकिन 2300 युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। इससे पहले भी करीब 80 अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर चार दिनों के लिए जेल भेजा जा चुका है। अभ्यर्थियों ने पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे इस संवैधानिक आंदोलन को कुचलने के लिए उन पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि वे केवल अपना हक मांग रहे हैं, जिसे प्रशासन दबाने की कोशिश कर रहा है।
सदन में गूंजी नियुक्ति की मांग
डीएड अभ्यर्थियों का यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप भी ले चुका है। विधानसभा सत्र के दौरान विधायक द्वारकाधीश यादव ने सदन में खाली पदों पर नियुक्ति का मामला उठाया। विपक्ष के सवाल उठाने के बाद सरकार पर दबाव बढ़ गया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में है और पद भी खाली हैं, तो फिर विभाग नियुक्ति पत्र जारी करने में देरी क्यों कर रहा है। सदन में हुई इस चर्चा से आंदोलनकारियों को उम्मीद बंधी है कि शायद अब सरकार की नींद टूटेगी।
झूठे केस वापस लेने और नियुक्ति की मांग
प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखी हैं। पहली यह कि उन पर दर्ज किए गए तमाम पुलिस केस तुरंत वापस लिए जाएं। दूसरी, आंदोलनकारियों के खिलाफ दमनकारी नीति बंद हो और तीसरी, 2300 पदों पर पात्र अभ्यर्थियों को तत्काल नियुक्ति दी जाए। अभ्यर्थियों ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और भी उग्र करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति की जिम्मेदारी पूरी तरह से शासन और प्रशासन की होगी।



