
Korba Corruption Case: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना में गबन का एक अनोखा और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सांसद आदर्श ग्राम तिलकेजा में फर्जीवाड़ा कर मृतकों और अपात्र ग्रामीणों के नाम पर पीएम आवास की स्वीकृति दे दी गई। इसके बाद पहली किश्त की राशि भी जारी कराकर हड़प ली गई। मामले की जांच में धांधली साबित होने पर जिला प्रशासन ने 5 संविदा कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। वहीं उरगा थाने में तत्कालीन पंचायत सचिव समेत 6 आरोपियों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
आदर्श गांव तिलकेजा में पीएम आवास का बड़ा घोटाला
PMAY Fraud Chhattisgarh: कोरबा के पूर्व सांसद स्व. डॉ. बंशीलाल महतो ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत तिलकेजा गांव का चयन किया था। इस गांव में विकास कार्यों के बीच पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों ने मिलकर आवास योजना में बड़ा खेल कर दिया। जिन्हें पूर्व में अपात्र घोषित किया गया था, उनमें से 48 लोगों को ग्रामसभा की आड़ में दोबारा पात्र बताकर आवास स्वीकृत कर दिया गया।
11 मृतकों के नाम पर जारी कर दी गई आवास की राशि
फर्जीवाड़े की हद तो तब हो गई जब फर्जी ग्रामसभा के जरिए स्वर्गवासी हो चुके ग्रामीणों के नाम पर भी मकान स्वीकृत कर दिए गए। जब शिकायत के बाद मामले की उच्चस्तरीय जांच हुई, तो पता चला कि स्वीकृत 48 नामों में से केवल 4 ग्रामीण ही वास्तव में पात्र थे। शेष अपात्रों में से 11 लोगों की मृत्यु कई साल पहले ही हो चुकी थी।
परिजनों और असली हितग्राहियों को भनक तक नहीं लगी
जिन ग्रामीणों या उनके दिवंगत परिजनों के नाम पर पीएम आवास स्वीकृत किए गए थे, उन्हें इस प्रक्रिया की कोई जानकारी नहीं थी। जालसाजों ने चालाकी दिखाते हुए असली हितग्राहियों के बजाय उनके मिलते-जुलते नाम वाले दूसरे लोगों के बैंक खाते पोर्टल में जुड़वा दिए। जैसे ही पहली किश्त की रकम खातों में आई, आरोपियों ने आपस में राशि की बंदरबांट कर ली।
आरटीआई कार्यकर्ता की शिकायत पर हुई जिला स्तरीय जांच
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र साहू की शिकायत के बाद हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन ने जिला स्तरीय जांच दल का गठन किया। जांच समिति ने पंचायत स्तर पर योजना के क्रियान्वयन से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों के दस्तावेजों की गहनता से पड़ताल की, जिसमें धांधली की पुष्टि हुई।
5 संविदा कर्मी बर्खास्त, तत्कालीन सचिव पहले ही निलंबित
जांच में दोषी पाए जाने के बाद 5 संविदा कर्मचारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं। इनमें ब्लॉक समन्वयक देवानंद श्रीवास, तकनीकी सहायक अभिषेक चौरसिया, डाटा एंट्री ऑपरेटर ध्रुव कुमार साहू, कंप्यूटर ऑपरेटर धनंजय पटेल और आवास मित्र रामेश्वरी कंवर शामिल हैं। ग्राम पंचायत की तत्कालीन सचिव नमिता दुबे को पहले ही निलंबित किया जा चुका है और उनके खिलाफ विभागीय जांच चल रही है।
उरगा थाने में 6 आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुई FIR
प्रशासनिक कार्रवाई के साथ ही इस मामले में पुलिसिया कार्रवाई भी शुरू हो गई है। जिला पंचायत कोरबा में पीएम आवास योजना के जिला समन्वयक आशीष कुमार की रिपोर्ट पर उरगा पुलिस ने मामला दर्ज किया है। शिकायत में बताया गया है कि आरोपियों ने गलत मंशा से असंबद्ध व्यक्तियों के खातों में शासकीय राशि हस्तांतरित कर भ्रष्टाचार किया है।
सरपंच की भूमिका पर उठे सवाल, नहीं मिले ठोस सबूत
हालांकि इस पूरे मामले में ग्राम पंचायत की सरपंच की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इतने बड़े पैमाने पर हुए घोटाले में पंचायत प्रमुख की सहभागिता के बिना कागजी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान फिलहाल सरपंच के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं, इसलिए एफआईआर में नाम शामिल नहीं है।
पुलिस ने शुरू की जांच, जल्द होगी आरोपियों की गिरफ्तारी
उरगा थाना पुलिस ने छह नामजद आरोपियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस बैंक खातों के लेनदेन और दस्तावेजों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि धोखाधड़ी और सरकारी धन के गबन के इस मामले में सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
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