
छत्तीसगढ़ सरकार ने नारायणपुर के एक गर्ल्स कॉलेज में हुई बड़ी वित्तीय गड़बड़ी पर सख्त कदम उठाया है। जेम पोर्टल के जरिए सामान खरीदने में बरती गई लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप में प्राचार्य सहित पांच सहायक प्राध्यापकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी इस आदेश के बाद पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है। शासन ने साफ कर दिया है कि दोषियों के खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया भी अलग से चलाई जाएगी।
पीएम-उषा योजना के बजट में की गई भारी गड़बड़ी
जांच में सामने आया कि नवीन वीरांगना रमोतिन माड़िया शासकीय आदर्श महिला महाविद्यालय को पीएम-उषा योजना के तहत एक बड़ा फंड दिया गया था। इस राशि का इस्तेमाल कॉलेज की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए होना था। लेकिन प्राचार्य और प्रोफेसरों ने आपसी मिलीभगत से इस पैसे के इस्तेमाल में आर्थिक अनियमितताएं कीं। जांच कमेटी की रिपोर्ट में आर्थिक लाभ लेने के लिए नियमों के उल्लंघन की बात पुख्ता हुई है।
भंडार क्रय नियमों की जमकर उड़ी धज्जियां
निलंबन आदेश में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि इन अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम 2002 का पालन नहीं किया। जेम पोर्टल से जो भी सामग्री खरीदी गई उसकी प्रक्रिया में पारदर्शिता की भारी कमी थी। जांच टीम ने पाया कि इन अधिकारियों का यह काम छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के पूरी तरह खिलाफ था। नियमों को ताक पर रखकर की गई इस खरीदारी से सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा है।
ये हैं वे अधिकारी जिन पर गिरी शासन की गाज
सस्पेंड होने वाले अधिकारियों में मुख्य रूप से प्राचार्य डॉ. योगेन्द्र कुमार पटेल शामिल हैं। इनके साथ ही सहायक प्राध्यापक भूषण जय गोयल, किशोर कुमार कोठारी, हरीश चंद बैद और नोहर राम पर भी कार्रवाई की गई है। इन सभी को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। शासन अब इस मामले की जड़ तक जाने के लिए सबूतों को और गहराई से खंगाल रहा है।
मुख्यालय बदला गया और अब होगी विस्तृत जांच
निलंबन की अवधि के दौरान इन सभी पांचों प्राध्यापकों का मुख्यालय जगदलपुर तय किया गया है। इन्हें क्षेत्रीय अपर संचालक कार्यालय में अपनी उपस्थिति देनी होगी। नियम के अनुसार सस्पेंशन के दौरान इन्हें जीवन निर्वाह भत्ता तो मिलेगा लेकिन वे बिना अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ पाएंगे। सरकार का मकसद इस मामले में सख्त उदाहरण पेश करना है ताकि भविष्य में कोई सरकारी फंड के साथ खिलवाड़ न कर सके।
भ्रष्ट अधिकारियों को विभाग ने दिया कड़ा संदेश
नारायणपुर कॉलेज के इस मामले ने प्रदेश के दूसरे सरकारी संस्थानों के लिए भी एक चेतावनी जारी की है। उच्च शिक्षा विभाग ने यह दिखा दिया है कि सरकारी योजनाओं के पैसे में भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा। आने वाले दिनों में जांच के दायरे को और बढ़ाया जा सकता है जिसमें कुछ अन्य लोगों के नाम भी सामने आने की संभावना है। फिलहाल इस कार्रवाई से कॉलेज के स्टाफ और स्थानीय लोगों के बीच काफी चर्चा है।



