
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से धोखाधड़ी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। यहां एक प्रधान पाठक सालों तक फर्जी दस्तावेजों के सहारे अपनी असली पहचान छिपाकर नौकरी करता रहा। मामले का खुलासा तब हुआ जब एक ग्रामीण ने कलेक्टर से इसकी लिखित शिकायत की। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद प्रशासन ने आरोपी शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
कलेक्टर की चौखट तक पहुंची प्रधान पाठक की शिकायत
Balrampur News: इस पूरे फर्जीवाड़े की नींव तब हिली जब ग्राम कुशफर के निवासी सत्यनारायण ने 11 अप्रैल 2025 को कलेक्टर के समक्ष एक शिकायती पत्र पेश किया। इस शिकायत में दावा किया गया था कि शासकीय प्राथमिक शाला कोल्हुआ में पदस्थ प्रधान पाठक लालमन सिंह ने विभाग को गुमराह किया है। आरोप था कि उन्होंने सरकारी नौकरी पाने के लिए न केवल अपना नाम बदला बल्कि पिता का नाम भी गलत दर्ज कराया ताकि वे सत्यापन की प्रक्रिया से बच सकें।
जिला शिक्षा अधिकारी की जांच में खुली पोल
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने एक विशेष जांच टीम का गठन किया। जांच दल ने स्कूल जाकर दस्तावेजों का मिलान किया और गांव के बुजुर्गों व अन्य लोगों के बयान दर्ज किए। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे परतें खुलती गईं और यह साफ हो गया कि प्रधान पाठक ने भर्ती के समय विभाग को जो दस्तावेज सौंपे थे, वे पूरी तरह फर्जी थे।
‘लालमन’ की आड़ में नौकरी कर रहा था ‘रामदुलार’
जांच रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए वह चौंकाने वाले थे। विभाग को पता चला कि जिस व्यक्ति को दुनिया ‘लालमन सिंह’ (पिता रामवृक्ष) के नाम से जानती थी, उसका असली नाम रामदुलार (पिता जीतू) है। रामदुलार ने किसी अन्य व्यक्ति की पहचान चुराकर या फर्जी रिकॉर्ड बनाकर खुद को लालमन के रूप में पेश किया और प्रधान पाठक जैसे जिम्मेदार पद तक पहुंच गया।
आचरण नियमों के उल्लंघन पर गिरी गाज
दस्तावेजों की स्क्रूटनी में फर्जीवाड़ा साबित होने के बाद इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-3 का गंभीर उल्लंघन माना गया। किसी भी लोक सेवक के लिए अपनी पहचान छिपाना और गलत जानकारी देकर पद हासिल करना अक्षम्य अपराध की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी ने निलंबन की कार्रवाई का आदेश जारी किया।
तत्काल प्रभाव से निलंबन और नया मुख्यालय तय
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत आरोपी प्रधान पाठक को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है। निलंबन की इस अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय रामचंद्रपुर तय किया गया है। अब उन्हें रोजाना वहां अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी और बिना अनुमति के वे मुख्यालय नहीं छोड़ पाएंगे।

वेतन रिकवरी और एफआईआर की तैयारी
विभाग इस मामले को केवल निलंबन तक सीमित नहीं रखना चाहता। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर अब पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके साथ ही विभाग इस कानूनी पहलू पर भी विचार कर रहा है कि फर्जी तरीके से नौकरी के दौरान आरोपी ने सरकारी खजाने से जो वेतन लिया है, उसकी वसूली कैसे की जाए।
फर्जीवाड़ा करने वालों के लिए बड़ा सबक
बलरामपुर की यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो गलत तरीके से सिस्टम में घुसपैठ करने की कोशिश करते हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि पहचान छिपाकर या दस्तावेजों में हेरफेर कर नौकरी हासिल करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। राज्य में इसे हाल के दिनों की सबसे बड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाहियों में से एक माना जा रहा है।
विभाग के भीतर सत्यापन प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस घटना के उजागर होने के बाद अब विभाग के भीतर भी इस बात की चर्चा है कि आखिर भर्ती के समय दस्तावेजों का बारीकी से सत्यापन क्यों नहीं हुआ। आने वाले दिनों में जिले के अन्य संदिग्ध शिक्षकों के रिकॉर्ड की भी जांच हो सकती है। फिलहाल रामदुलार उर्फ लालमन सिंह के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है और जल्द ही इस मामले में बड़ी गिरफ्तारी की संभावना है।



