
पड़ोसी देश पाकिस्तान एक बार फिर लॉकडाउन की दहलीज पर खड़ा है। दुनिया भर में चल रहे ईरान-अमेरिका और इजरायल युद्ध की तपिश अब पाकिस्तान के घरों के चूल्हों तक पहुंच गई है। युद्ध के कारण तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे पहले से ही आर्थिक तंगी झेल रहे पाकिस्तान की कमर टूट गई है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार अब पूरे देश में ‘स्मार्ट लॉकडाउन’ लगाने की तैयारी कर रही है। यह लॉकडाउन किसी वायरस को रोकने के लिए नहीं, बल्कि देश में बचे-कुचे पेट्रोल और बिजली के भंडार को बचाने के लिए लगाया जा रहा है।
रात 9:30 बजे के बाद थम जाएगी शहरों की रफ्तार
सरकार की नई कार्ययोजना के अनुसार, अब पाकिस्तान के बड़े शॉपिंग मॉल और बाजारों को देर रात तक गुलजार रहने की इजाजत नहीं होगी। रात 9:30 बजते ही बाजारों को बंद करने का आदेश जारी किया जा सकता है। इतना ही नहीं, फिजूलखर्ची रोकने के लिए शादी-ब्याह के कार्यक्रमों पर भी सख्त पाबंदियां लगा दी गई हैं। अब किसी भी मैरिज हॉल में 200 से ज्यादा मेहमानों को बुलाने की अनुमति नहीं होगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की बढ़ती कीमतों का डर इतना ज्यादा है कि इस खबर की चर्चा अब सरहद पार भारत के व्यापारिक हलकों में भी होने लगी है।
दफ्तरों के लिए हाइब्रिड मॉडल और एसी पर रोक
बिजली बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों के कामकाजी तौर-तरीकों में भी बड़ा बदलाव किया गया है। नए प्रस्ताव के तहत सरकारी कर्मचारियों को अब हफ्ते में सिर्फ 3 दिन ही कार्यालय बुलाया जाएगा, जबकि बाकी 2 दिन उन्हें ‘वर्क फ्रॉम होम’ यानी घर से ही काम करना होगा। इसके अलावा, सुबह 10:30 बजे से पहले सरकारी इमारतों में एसी चलाने पर सख्त पाबंदी लगा दी गई है। सरकार का लक्ष्य है कि अगले 60 दिनों के भीतर कम से कम आधी सरकारी इमारतों को सौर ऊर्जा पर शिफ्ट कर दिया जाए ताकि बिजली के बिल और खर्च में कटौती की जा सके।
पेट्रोल भत्ते में कटौती और सरकारी गाड़ियां होंगी जब्त
ईंधन की एक-एक बूंद बचाने के लिए सरकार अब सख्त कदम उठा रही है। अधिकारियों को मिलने वाले पेट्रोल भत्ते में भारी कटौती की जा रही है। अगर कोई भी अधिकारी सरकारी वाहन का निजी या गलत इस्तेमाल करता हुआ पाया गया, तो उसकी गाड़ी तुरंत जब्त कर ली जाएगी। यही नहीं, खर्च किए गए पेट्रोल की कीमत भी संबंधित अधिकारी की जेब से ही वसूली जाएगी। बड़े अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अलग-अलग गाड़ियों के बजाय ‘पूल ट्रांसपोर्ट’ का इस्तेमाल करें और मिल-जुलकर एक ही गाड़ी से दफ्तर पहुंचें।
व्यापार जगत में डर और वैश्विक संकट का असर
पाकिस्तान की इस बदहाली का मुख्य कारण वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव है। सप्लाई रुकने से वहां की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें और बिजली की भारी कटौती ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। सरकार का यह ‘खतरनाक’ प्लान जनता के बीच आक्रोश पैदा कर सकता है, लेकिन प्रशासन का दावा है कि अगर ये कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो देश में ऊर्जा का पूरा ढांचा ढह सकता है।
आने वाले 60 दिन होंगे पाकिस्तान के लिए अग्निपरीक्षा
अगले दो महीने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और वहां की आवाम के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। सरकार सौर ऊर्जा और वैकल्पिक साधनों पर जोर तो दे रही है, लेकिन इतनी जल्दी बड़े बदलाव करना आसान नहीं होगा। अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध की स्थिति शांत नहीं होती है, तो पाकिस्तान में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। फिलहाल वहां की जनता को अंधेरे और कम ईंधन के साथ ही अपना गुजारा करना होगा।



