
रायपुर, 7 मार्च 2025। Chhattisgarh Assembly: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा CGMSC के माध्यम से रिएजेंट की खरीदी पर गंभीर सवाल उठाए गए। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के बीच इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस हुई। चंद्राकर ने रिएजेंट खरीदी में हुई गड़बड़ी को लेकर सवाल उठाए, वहीं मंत्री जायसवाल ने मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात की।
अजय चंद्राकर ने उठाए गंभीर सवाल
Kurud MLA Ajay Chandrakar: इस मामले की शुरुआत भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने विधानसभा में उठाए गए सवालों से की। चंद्राकर ने सबसे पहले रिएजेंट की खरीदी, उसकी राशि और सप्लाई के दिनों से जुड़ी जानकारी मांगी। उनका आरोप था कि इस पूरे मामले में कुछ अधिकारियों और सप्लायर की मिलीभगत से गड़बड़ी की गई। चंद्राकर ने आरोप लगाया कि सरकारी धन का सही इस्तेमाल नहीं किया गया और अनियमितताओं का पर्दाफाश किया जाना चाहिए।
मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का जवाब
Minister Shyam Bihari Jaiswal: इस पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जवाब देते हुए कहा कि 453 करोड़ रुपये की रिएजेंट की खरीदी की गई, जबकि बजट केवल 120 करोड़ रुपये का था। उन्होंने बताया कि मोक्षित कॉर्पोरेशन से हुए इस खरीदारी में तीन बड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं। इनमें से एक यह थी कि सामान की आपूर्ति तय कीमत से आठ-दस गुना ज्यादा दर पर की गई, और दूसरा यह कि 700 मशीनें अब तक चालू नहीं हो पाई हैं। इसके अलावा, क्लोज मशीन की जगह ओपन मशीन की आपूर्ति की गई।
मंत्री ने यह भी बताया कि विभागीय जांच में पाया गया कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से यह गड़बड़ी हुई थी। इस जांच रिपोर्ट में दो बड़े अधिकारियों सहित कुल 15 अधिकारियों को दोषी पाया गया है। मंत्री ने कहा कि इन अधिकारियों के नाम ईओडब्ल्यू (इकोनॉमिक्स ऑफेंस विंग) को भेज दिए गए हैं, और कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही, सप्लायर को भी जेल भेजा जा चुका है।
बिना आदेश के 385 करोड़ की खरीद
CGMSC Scam: मंत्री जायसवाल ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि वर्ष 2024-25 के लिए रिएजेंट की खरीदी के लिए केवल 120 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत था, लेकिन कुल 385 करोड़ रुपये की खरीदी की गई। यह मामला जब विभागीय जांच में सामने आया तो उसे ईओडब्ल्यू को सौंपा गया। अब तक की जांच में 15 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
चंद्राकर ने यह भी सवाल उठाया कि क्या मोक्षित कॉर्पोरेशन ने इस गड़बड़ी में भाग लिया था। इस पर मंत्री ने कहा कि यह खरीदी बिना किसी आदेश के की गई और आपूर्ति की गई सामग्री की कीमत तय दर से कई गुना अधिक थी। उन्होंने कहा कि सप्लायर को पहले ही जेल भेजा जा चुका है और जांच जारी है।
तात्कालिक प्रतिक्रिया और कार्रवाई
अजय चंद्राकर ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला किसी बड़े घोटाले का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों ने बिना बजट के खरीदी की और गलत तरीके से सरकारी धन का इस्तेमाल किया। वहीं, मंत्री जायसवाल ने आश्वासन दिया कि इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ जांच की जा रही है और दोषियों को सजा दिलवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
यह बहस छत्तीसगढ़ विधानसभा में एक महत्वपूर्ण मोड़ लेकर आई, जिसमें सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी और पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए। राज्य सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती होगी कि वह इस मामले में पूरी जांच कराएं और दोषियों को सजा दिलवाने में सफल रहे, ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियां न हो।