
धमतरी जिले के मगरलोड विकासखंड में स्थित पवई रानी माता मंदिर अब अपनी नई पहचान बनाने के लिए तैयार है। जिला प्रशासन ने इस धार्मिक स्थल को एक बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने हाल ही में पहांदा क्षेत्र का दौरा कर मंदिर परिसर, पास में स्थित वॉटरफॉल और झील का बारीकी से निरीक्षण किया। प्रशासन का मानना है कि इस क्षेत्र में प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं छिपी हुई हैं।
मंदिर परिसर का होगा सौंदर्यीकरण
कलेक्टर ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को मंदिर परिसर को सुव्यवस्थित और सुंदर बनाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए यहां मूलभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। योजना के तहत परिसर में बैठने की उत्तम व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, रोशनी के लिए सोलर लाइट और आधुनिक शौचालयों का निर्माण कराया जाएगा। साथ ही, मंदिर तक पहुंचने वाले मुख्य मार्ग को भी चौड़ा और पक्का किया जाएगा ताकि बारिश के मौसम में भी भक्तों को परेशानी न हो।

वॉटरफॉल और झील के पास कड़े सुरक्षा इंतजाम
पर्यटन के साथ-साथ सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर ने वॉटरफॉल और झील के किनारों पर विशेष प्रबंध करने को कहा है। पहाड़ी रास्तों और पानी के पास हादसों को रोकने के लिए मजबूत रेलिंग लगाई जाएगी। इसके अलावा, पर्यटकों को सचेत करने के लिए चेतावनी बोर्ड और सुरक्षित पैदल मार्ग (पाथवे) तैयार किए जाएंगे। इन उपायों का मकसद यह है कि लोग प्रकृति के इस हसीन नजारे का आनंद बिना किसी डर या खतरे के ले सकें।
स्थानीय युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के द्वार
धमतरी जिला प्रशासन का मानना है कि इस स्थल के विकसित होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। जब यह क्षेत्र एक प्रमुख पिकनिक स्पॉट और धार्मिक स्थल के रूप में उभरेगा, तो यहां गाइड, खाने-पीने की दुकानों और परिवहन के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। कलेक्टर ने अधिकारियों को आपसी समन्वय से एक चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार करने को कहा है ताकि विकास का काम समय सीमा के भीतर पूरा हो सके।
धमतरी की पर्यटन पहचान को मिलेगी मजबूती
पवई रानी माता मंदिर को जिले के प्रमुख पर्यटन सर्किट से जोड़ने की तैयारी है। प्रशासन प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में यह मंदिर और वॉटरफॉल न केवल स्थानीय लोगों बल्कि बाहरी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। इससे जिले की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान मिलेगी।
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