
New Toll Policy: भारत की सड़कों पर अब यात्रा का अनुभव बदलने वाला है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय देशभर में नई टोल नीति लागू करने की तैयारी में है, जिसमें यात्रियों से दूरी के अनुसार टोल टैक्स वसूला जाएगा। यह न केवल पुराने फ्लैट रेट टोल सिस्टम को खत्म करेगा, बल्कि डिजिटल टेक्नोलॉजी की मदद से टोल कलेक्शन को पारदर्शी, तेज़ और बाधा-मुक्त बनाएगा।

प्रति किलोमीटर आधारित टोल सिस्टम
अब टोल शुल्क वाहन द्वारा तय की गई दूरी के आधार पर लिया जाएगा।
उदाहरण:
- कार/जीप के लिए लगभग ₹110 प्रति 100 किमी
- हल्के व्यवसायिक वाहन (LCV): ₹180
- बस/ट्रक: ₹360 तक
इससे छोटे रूट पर यात्रा करने वाले यात्रियों को अधिक भुगतान नहीं करना पड़ेगा, जैसा पहले फिक्स टोल दरों में होता था।
जीपीएस और एएनपीआर आधारित बैरियर-लेस टोलिंग
नई व्यवस्था में FASTag, GPS और ANPR (Automatic Number Plate Recognition) तकनीक का इस्तेमाल होगा।
- वाहन बिना रुके ऑटोमैटिक तरीके से ट्रैक होंगे
- टोल सीधे खाते से कटेगा
- टोल बूथ पर रुकने की ज़रूरत नहीं होगी
इससे न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि ईंधन भी बचेगा और लंबी कतारों से राहत मिलेगी।

वार्षिक FASTag पास: ₹3,000 में अनलिमिटेड सफर
सरकार एक ₹3,000 सालाना पास योजना भी लाने की तैयारी में है, जिससे निजी वाहन मालिकों को पूरे साल अनलिमिटेड यात्रा की सुविधा मिलेगी।
- खासकर रोज़ाना ऑफिस, स्कूल या कारोबार के लिए आने-जाने वालों के लिए यह एक किफायती विकल्प होगा।
ईवी और दोपहिया वाहनों के लिए विशेष छूट
हरित यात्रा को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को विशेष रियायत दी जाएगी:
- EV के लिए 100 किमी पर सिर्फ ₹80
- साथ ही 20% अतिरिक्त छूट
इसके अलावा दोपहिया वाहनों को भी कुछ निजी मार्गों पर पूर्ण या आंशिक छूट दी जा सकती है।
सरकार की मंशा: पारदर्शिता, सुविधा और ग्रीन ट्रैवल
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि “नई टोल पॉलिसी से कोई शिकायत नहीं करेगा।”
इस टेक-ड्रिवन बदलाव से:
- टोल ऑपरेटर की गड़बड़ियों पर रोक लगेगी
- ट्रैफिक डेटा से सटीक राजस्व संग्रह होगा
- यात्रियों को पारदर्शी और सुविधाजनक टोल सिस्टम मिलेगा
क्या होगा असर?
| क्षेत्र | बदलाव | फायदा |
|---|---|---|
| यात्री अनुभव | टोल बूथ खत्म, रुकावट नहीं | सफर तेज और सुगम |
| शुल्क प्रणाली | दूरी के आधार पर शुल्क | ज्यादा भुगतान से राहत |
| सरकारी राजस्व | ट्रैकिंग आधारित डेटा | पारदर्शिता और नियंत्रण |
| ग्रीन मोबिलिटी | EV को प्रोत्साहन | पर्यावरण लाभ और सस्ता सफर |
कब से लागू होगी नई व्यवस्था?
- GPS और ANPR आधारित पायलट प्रोजेक्ट देश के कुछ टोल बूथों पर शुरू हो चुका है
- मार्च–अप्रैल 2026 तक इसे पूरे भारत में लागू करने की योजना है
ग्रामीण और छोटे वाहन चालकों के लिए भी राहत
- दोपहिया वाहनों के लिए टोल से आंशिक या पूर्ण छूट पर विचार
- ग्रामीण और किसान वर्ग के लिए विशेष टोल योजनाएं बनाई जा रही हैं
- ऐसे क्षेत्रों में FASTag या GPS अनिवार्यता सीमित की जा सकती है
अगले कदम क्या होंगे?
- देशभर में स्केल-अप के लिए पायलट का विश्लेषण
- हर वाहन में ऑन-बोर्ड यूनिट (OBU) इंस्टॉल करने की तैयारी
- नागरिकों के लिए विस्तृत गाइडलाइन और अपडेटेड FASTag प्रणाली जल्द जारी होगी



