
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा 15 अगस्त को की गई घोषणा अब हकीकत बनने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, 31 दिसंबर को होने वाली कैबिनेट की बैठक में इस नए सिस्टम से जुड़े अध्यादेश को मंजूरी मिल सकती है। इसके लिए कानून में आवश्यक संशोधन का मसौदा तैयार कर लिया गया है। सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा तो जनवरी 2026 के पहले पखवाड़े में रायपुर को अपना पहला पुलिस कमिश्नर मिल जाएगा। प्रशासन ने राजभवन के पास स्थित पुराने पुलिस मुख्यालय भवन को कमिश्नर कार्यालय के लिए चुन लिया है और वहां तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं।
शक्तिशाली होगा पुलिस प्रमुख का पद: मजिस्ट्रियल अधिकारों से लैस होगा नया मुख्यालय
इस नई व्यवस्था के लागू होते ही पुलिस की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव आएगा। पुलिस कमिश्नर के पद पर आईजी स्तर के किसी वरिष्ठ अधिकारी को तैनात किया जाएगा। कमिश्नरी सिस्टम आने के बाद पुलिस प्रमुख को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां भी मिल जाएंगी। अब तक जो अधिकार जिला कलेक्टर के पास होते थे, उनमें से कई अब पुलिस कमिश्नर के पास होंगे। इसमें धारा 144 लागू करना, जरूरत पड़ने पर शहर में कर्फ्यू लगाने का निर्णय लेना और हथियारों के लाइसेंस (शस्त्र लाइसेंस) जारी करने जैसे अहम अधिकार शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से अपराध नियंत्रण और आपातकालीन स्थितियों में फैसले लेने की रफ्तार तेज होगी, जिससे अपराधियों में खौफ पैदा होगा।
प्रदीप गुप्ता समिति की रिपोर्ट पर बनी सहमति: इन दिग्गजों के नामों की हो रही चर्चा
रायपुर में इस सिस्टम को लागू करने से पहले एडीजी प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता में बनी उच्चस्तरीय समिति ने महाराष्ट्र, दिल्ली और कर्नाटक जैसे राज्यों के पुलिस मॉडल का बारीकी से अध्ययन किया था। समिति की रिपोर्ट और गृह विभाग के प्रस्ताव के बाद अब पहले पुलिस कमिश्नर के नाम पर सस्पेंस बना हुआ है। रेस में वर्तमान रायपुर आईजी अमरेश मिश्रा के साथ-साथ संजीव शुक्ला, रामगोपाल गर्ग, सुंदरराज पी, दीपक झा और अजय यादव जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के नाम चल रहे हैं। राज्य सरकार एक ऐसे अधिकारी को यह कमान सौंपना चाहती है जो राजधानी की भौगोलिक स्थिति और चुनौतियों से अच्छी तरह वाकिफ हो। यह प्रयोग सफल होने पर भविष्य में प्रदेश के अन्य बड़े शहरों में भी इसे लागू किया जा सकता है।



