
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। गरीबों के निवाले पर डाका डालने वाले राशन दुकानदारों के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच में पता चला है कि जिले की दर्जनों दुकानों से करोड़ों रुपये का राशन गायब कर दिया गया। इस घोटाले के उजागर होने के बाद हड़कंप मच गया है और अब तक कुल 20 राशन विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए जा चुके हैं। प्रशासन की इस सख्ती ने भ्रष्ट सिस्टम की कमर तोड़ दी है।
एसडीएम की जांच में खुली भ्रष्टाचार की पोल
राशन वितरण में हो रही धांधली की शिकायतें मिलने के बाद इसकी जांच का जिम्मा संबंधित ब्लॉक के एसडीएम (SDM) को सौंपा गया था। जांच टीम ने जब स्टॉक रजिस्टरों और भौतिक सत्यापन का मिलान किया, तो भारी विसंगतियां पाई गईं। शुरुआती दौर में 87 दुकानों की शिकायत मिली थी, जिनमें से 66 दुकानों में सीधे तौर पर राशन का शॉर्टेज (कमी) पाया गया। अधिकारियों के अनुसार, यह घोटाला सुनियोजित तरीके से मार्च 2024 से अप्रैल 2025 के बीच अंजाम दिया गया था।
2.62 करोड़ रुपये का राशन डकार गए दुकानदार
खाद्य विभाग और प्रशासनिक टीम द्वारा किए गए भौतिक मूल्यांकन में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इन दुकानों से करीब 6560 क्विंटल चावल गायब मिला है। केवल चावल ही नहीं, बल्कि गरीबों को मिलने वाला गुड़, शक्कर और चना भी बाजारों में खपा दिया गया। इस पूरे गबन की कुल अनुमानित कीमत 2.62 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह पैसा सीधे तौर पर जनता के हक का था, जिसे दुकानदारों ने अपनी जेब भरने के लिए इस्तेमाल किया।
गायब राशन का लेखा-जोखा: चना, गुड़ और शक्कर भी नदारद
जांच रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि किस वस्तु में कितनी हेराफेरी हुई है। आंकड़ों के अनुसार:
- 22 दुकानों में करीब 158 क्विंटल चना गायब पाया गया।
- 10 दुकानों में 19 क्विंटल गुड़ का स्टॉक कम मिला।
- 44 दुकानों में 87 क्विंटल शक्कर का हिसाब-किताब नहीं मिला।यह दिखाता है कि राशन माफिया ने दाल-चावल से लेकर मीठे तक, किसी भी चीज को नहीं बख्शा। विभाग ने इन सभी अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए नोटिस जारी करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
छात्रावासों के राशन में भी की गई हेराफेरी
इस घोटाले की सबसे शर्मनाक बात यह है कि छात्रावासों के लिए आवंटित होने वाले राशन में भी सेंधमारी की गई। हालिया कार्रवाई में उन 6 दुकानों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं, जो छात्रावासों और उचित मूल्य की दुकानों में राशन वितरण के दौरान हेराफेरी कर रहे थे। बच्चों और छात्रों के हिस्से का अनाज बाजार में बेचने की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने बिना देरी किए सख्त रुख अपनाया और इन दुकानों का संचालन बंद करा दिया।
नई एजेंसियों को कमान, वितरण व्यवस्था सुचारु करने की कोशिश
लाइसेंस निलंबन के बाद उन क्षेत्रों में राशन वितरण की व्यवस्था ठप न हो, इसके लिए विभाग ने वैकल्पिक इंतजाम शुरू कर दिए हैं। कई स्थानों पर पुरानी और दागी एजेंसियों को हटाकर नई सहकारी समितियों या स्वयं सहायता समूहों को दुकानों का संचालन सौंपा जा रहा है। खाद्य विभाग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच और कार्रवाई के बीच किसी भी गरीब परिवार को अपने हक के राशन के लिए भटकना न पड़े।
लापरवाह विक्रेताओं को पहले दी गई थी चेतावनी
प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई है। इससे पहले कई दुकानदारों को समय पर राशन वितरण करने और स्टॉक का सही ब्यौरा देने के लिए चेतावनी और नोटिस जारी किए गए थे। बावजूद इसके, कई दुकानदारों ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया और गबन जारी रखा। बार-बार दी गई मोहलत का फायदा उठाने के बजाय लापरवाही बरतने वाले विक्रेताओं पर अब कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो गया है।
आने वाले दिनों में और भी कड़े एक्शन के संकेत
बस्तर कलेक्टर और खाद्य विभाग के अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि यह तो बस शुरुआत है। अभी कई और दुकानों की जांच रिपोर्ट आना बाकी है, जिससे घोटाले का आंकड़ा और बढ़ सकता है। विभाग ने संकेत दिए हैं कि जिन दुकानदारों ने गबन की गई राशि जमा नहीं की या संतोषजनक जवाब नहीं दिया, उनके खिलाफ न केवल लाइसेंस रद्द किया जाएगा बल्कि आपराधिक मामला (FIR) भी दर्ज कराया जाएगा।



