
बिलासपुर में रेंज साइबर पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गैंग का भंडाफोड़ किया है जो पीएम समृद्धि योजना के नाम पर आसान लोन दिलाने का दावा कर लोगों से बड़ी रकम वसूल रहा था। पुलिस ने इस गैंग के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को वित्तीय संस्था का अधिकारी बताकर भरोसा जीतते और कम ब्याज में लोन दिलाने का झांसा देते थे।
मेडिकल व्यवसायी से 73 लाख रुपये की ठगी
सकरी क्षेत्र के एक मेडिकल व्यवसायी को फोन कर आरोपी ने खुद को श्रीराम सिटी यूनियन फाइनेंस, मुंबई का अधिकारी बताया। लगातार संपर्क में रहकर उन्हें 50 लाख रुपये के लोन पर भारी रियायत का लालच दिया गया। इसके लिए अलग अलग लिंक और खातों में रकम ट्रांसफर करने को कहा गया। पीड़ित ने निर्देशों पर भरोसा किया और कई किश्तों में कुल 73 लाख 23 हजार 291 रुपये भेज दिए।
तकनीकी जांच से खुला ठगों का नेटवर्क
शिकायत मिलने पर रेंज साइबर थाना ने मामला दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू की। बैंक खातों और फर्जी सिम की पड़ताल में पता चला कि रकम बिहार के वैशाली जिले में संचालित खातों में जा रही है। इस आधार पर एक टीम बिहार भेजी गई। वहां लगातार खोज के बाद विकास कुमार उर्फ विक्रम सिंह और अमन कुमार सिंह उर्फ पीयूष को गढ़वाल कनौली क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।
दिल्ली में किराए के मकान से चलता था गिरोह
पूछताछ में आरोपियों ने माना कि वे दिल्ली से किराए के मकान में बैठकर लोगों को कॉल करते थे। फर्जी सिम और बैंक खातों का इस्तेमाल कर देशभर के लोगों को कम ब्याज का लोन देने का झांसा दिया जाता था। गिरोह के अन्य सदस्य अलग अलग नामों से खाते खुलवाते थे। ठगी की रकम इन्हीं खातों में जमा कर तुरंत निकाल ली जाती थी ताकि पुलिस तक कोई सुराग न पहुंचे।
अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी पुलिस
गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पुलिस अब गैंग के बाकी सदस्यों और पूरे लेनदेन की कड़ी दर कड़ी जानकारी जुटा रही है। इस मामले में उनके खिलाफ बीएनएस धारा 111 और आईटी एक्ट 66 डी सहित अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही गिरोह के अन्य सदस्यों पर भी शिकंजा कसा जाएगा।
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