National Jamboree Controversy: जंबूरी पर आर-पार: रायपुर लौटते ही बरसे सांसद बृजमोहन अग्रवाल, बोले- ‘बिना हटाए नया अध्यक्ष बनाना अवैध, अब कोर्ट में होगा फैसला’

रायपुर: छत्तीसगढ़ में ‘राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी’ को लेकर चल रहा सियासी संग्राम अब आर-पार की जंग में बदल गया है। दिल्ली से रायपुर लौटते ही सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सीधे तौर पर सरकार और संगठन के नए फैसलों को चुनौती दी है। एयरपोर्ट पर मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने साफ कहा कि वे भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के वैधानिक अध्यक्ष हैं और उन्हें हटाए बिना किसी दूसरे की नियुक्ति पूरी तरह से गैर-कानूनी है। अग्रवाल ने आरोप लगाया कि संगठन के नियमों को ताक पर रखकर नई घोषणाएं की गई हैं, जिसे वे कतई स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी गरिमा और पद की मर्यादा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

‘5 साल के लिए चुना गया था अध्यक्ष’: कार्यकाल पूरा होने से पहले नियुक्ति पर सवाल, वरिष्ठों को पहले ही दी थी चेतावनी

बृजमोहन अग्रवाल ने संगठन के संविधान का हवाला देते हुए कहा कि अध्यक्ष का पद 5 साल के कार्यकाल के लिए होता है। उन्होंने दावा किया कि इस बारे में उन्होंने पार्टी और सरकार के बड़े नेताओं को पहले ही जानकारी दे दी थी। अग्रवाल के मुताबिक, उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर नियमानुसार प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, तो वे कानूनी रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने कहा कि परिषद ने विसंगतियों को देखते हुए ही जंबूरी को स्थगित करने का फैसला लिया था, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया। इसी उपेक्षा के कारण अब उन्हें हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है।

इगो और ईगो की लड़ाई: राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जैन ने विवाद को बताया स्थानीय, कहा- व्यक्तिगत अहम छोड़ें नेता

इस खींचतान के बीच भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जैन भी रायपुर पहुंचे। हालांकि, उनका रुख बृजमोहन अग्रवाल से बिल्कुल अलग नजर आया। उन्होंने जंबूरी को लेकर किसी भी तरह के विवाद से इनकार करते हुए इसे स्थानीय स्तर का मामला बताया। जैन ने कहा कि जंबूरी रेंजर रोवर्स के लिए एक खास मौका है और इसे विवादों में नहीं घसीटना चाहिए। उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि सबको अपना ‘पर्सनल इगो’ छोड़कर काम पर ध्यान देना चाहिए। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने साफ किया कि दिल्ली को इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि स्थानीय स्तर पर अध्यक्ष कौन है, यह नियम और सरकार तय करेगी।

वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों पर सफाई: ‘सीएम से हो गई है चर्चा’, राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अनियमितता की खबरों को नकारा

जंबूरी के आयोजन में करीब 10 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता के जो आरोप बृजमोहन अग्रवाल ने लगाए थे, उन पर अनिल जैन ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि आयोजन में किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है और इस संबंध में उनकी मुख्यमंत्री से चर्चा हो चुकी है। राष्ट्रीय नेतृत्व ने आयोजन की तैयारियों पर संतोष जताते हुए इसे निर्बाध रूप से जारी रखने की बात कही है। जब उनसे अग्रवाल के कोर्ट जाने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने दोटूक कहा कि कोर्ट अपना काम करेगा और जिसे जाना है वह जाने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन इससे जंबूरी की साख पर फर्क नहीं पड़ना चाहिए।

सिंहदेव के बयान पर पलटवार: ‘मेरी स्थिति पर दुखी होने की जरूरत नहीं’, अपनी राह खुद बनाने का किया दावा

कांग्रेस नेता टीएस सिंहदेव ने हाल ही में कहा था कि बृजमोहन अग्रवाल की वर्तमान स्थिति देखकर उन्हें दुख होता है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अग्रवाल ने कड़े शब्दों में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनकी स्थिति पर किसी को दुखी या खुश होने की जरूरत नहीं है। अग्रवाल ने इशारों-इशारों में अपनी ही सरकार और विरोधियों को संदेश दिया कि वे अपनी जगह बनाना अच्छी तरह जानते हैं और वे किसी की सहानुभूति के मोहताज नहीं हैं। इस बयान ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है कि क्या अग्रवाल और सरकार के बीच की खाई अब और गहरी होने वाली है।

हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें: क्या रुक जाएगी जंबूरी? प्रशासन और प्रतिभागियों के बीच असमंजस बरकरार

अब पूरा मामला अदालत के पाले में है। बृजमोहन अग्रवाल की याचिका पर हाईकोर्ट क्या फैसला सुनाता है, इसी पर जंबूरी का भविष्य टिका हुआ है। यदि कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया, तो राज्य सरकार के लिए आयोजन को आगे बढ़ाना मुश्किल हो जाएगा। वहीं, दूसरी तरफ बालोद में जंबूरी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस कानूनी और राजनीतिक लड़ाई के बीच देशभर से आने वाले प्रतिभागियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आने वाले कुछ दिन छत्तीसगढ़ की राजनीति और स्काउट गाइड संगठन के भविष्य के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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