छत्तीसगढ़ में दो सालों में मंत्रियों के 12 से ज्यादा OSD और PA हटाए गए, विपक्ष ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप, तो सत्तापक्ष ने बताई ये वजह

रायपुर: छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के दो साल के कार्यकाल के दौरान मंत्रियों के निजी स्टाफ में बड़े पैमाने पर फेरबदल देखने को मिला है। पिछले 24 महीनों में करीब 6 मंत्रियों के 12 से ज्यादा ओएसडी (OSD) और पीए (PA) अपने पदों से हटाए जा चुके हैं। इस सामूहिक रवानगी ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। विपक्ष इस मुद्दे को भ्रष्टाचार और ‘पैसे के बंटवारे’ में विवाद से जोड़ रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे केवल प्रशासनिक सुधार और कामकाज की बेहतरी के लिए उठाया गया कदम बता रहा है।

इन मंत्रियों के सहयोगियों की हुई छुट्टी: लिस्ट में डिप्टी सीएम से लेकर कई कद्दावर चेहरे शामिल

सरकार के विभिन्न विभागों में काम कर रहे अधिकारियों और सहायकों को हटाने का सिलसिला लगातार जारी है। जिन मंत्रियों के स्टाफ में बदलाव हुए हैं, उनकी सूची काफी लंबी है।

  • स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल: इनके ओएसडी संजय मरकाम और अजय कन्नौजे को पद से हटाया गया।
  • उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन: इनके ओएसडी भागवत जायसवाल और पीए प्रवीण पांडेय की छुट्टी की गई।
  • डिप्टी सीएम अरुण साव: इनके ओएसडी विपुल गुप्ता को हटाया गया।
  • राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा: इनके ओएसडी दुर्गेश वर्मा, बी रघु और पीए दुर्गेश धारे हटाए गए।
  • खाद्य मंत्री दयालदास बघेल: इनके ओएसडी संजय गजघाटे की सेवाएं समाप्त की गईं।
  • कृषि मंत्री रामविचार नेताम: इनके ओएसडी तारकेश्वर देवांगन को हटाया गया।
  • वन मंत्री केदार कश्यप: इनके ओएसडी सुनील तिवारी और जितेंद्र गुप्ता को भी पद छोड़ना पड़ा।

संगठन तक पहुंची थी शिकायतें: सामंजस्य की कमी और विभागीय सुस्ती बनी हटाने की मुख्य वजह

सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मंत्रियों और उनके ओएसडी के बीच तालमेल ठीक नहीं था। कई मामलों में ओएसडी मंत्रियों के क्षेत्र और विभागीय कामकाज में वैसी सक्रियता नहीं दिखा रहे थे जैसी उनसे उम्मीद की जा रही थी। इसके अलावा भाजपा संगठन को भी कई माध्यमों से इन निजी सहायकों के व्यवहार और कामकाज को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। माना जा रहा है कि मंत्रियों के काम को और अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के लिए इन चेहरों को बदला गया है ताकि सरकार की छवि पर कोई आंच न आए।

कांग्रेस का तीखा वार: ‘पैसे की बंदरबांट’ पर छिड़ी जंग, डिप्टी सीएम बोले- ‘प्रशासनिक बदलाव सामान्य प्रक्रिया’

इस मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव का कहना है कि जब तक कोई बड़ी गड़बड़ी न हो, इतने बड़े पैमाने पर स्टाफ नहीं बदला जाता। वहीं कांग्रेस के अन्य नेताओं ने आरोप लगाया है कि मंत्रियों के बंगलों पर ‘दो-दो काउंटर’ चल रहे हैं और भ्रष्टाचार के पैसों के बंटवारे को लेकर हुई अनबन ही इस बदलाव की असली वजह है। इन आरोपों पर पलटवार करते हुए डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कि प्रशासनिक परिवर्तन एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन्होंने खुद भ्रष्टाचार के रिकॉर्ड बनाए, उन्हें हर जगह वही दिखता है।

Also Read: 8वीं पास को अपना PA बनाना चाहते थे छत्तीसगढ़ के ये कैबिनेट मंत्री, सामान्य प्रशासन विभाग ने मंत्री की इच्छा पर का इनकार

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button