
रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र का चौथा दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया। सत्र की शुरुआत होते ही कांग्रेस विधायक हाथों में ‘सत्यमेव जयते’ की तख्तियां लेकर सदन के भीतर दाखिल हुए। विपक्षी दल के सदस्य नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई का विरोध कर रहे थे। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार पर जांच एजेंसियों के गलत इस्तेमाल का सीधा आरोप मढ़ा। विपक्ष ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव पेश कर चर्चा की मांग की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इसे अस्वीकार कर दिया। इसके बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।

‘मजदूर’ शब्द पर भड़का विपक्ष, अडानी के नाम पर पलटवार
सदन की कार्यवाही, भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने विपक्ष द्वारा पोस्टर लहराने पर सवाल उठाए। इसी बीच विधायक धरमजीत सिंह की एक टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के बड़े नेताओं ने खुद पोस्टर नहीं पकड़े हैं बल्कि ‘मजदूरों’ से पोस्टर लगवाकर लाए हैं। इस शब्द पर कांग्रेस विधायक बुरी तरह भड़क गए और इसे जनप्रतिनिधियों का अपमान करार दिया। विपक्षी खेमे ने जवाबी हमला करते हुए भाजपा विधायकों को ‘अडानी का मजदूर’ कहना शुरू कर दिया। सदन के भीतर सामंती मानसिकता और मनरेगा के नाम बदलने जैसे मुद्दों को लेकर दोनों पक्षों में भारी नारेबाजी हुई।

तीन बार रुकी सदन की कार्यवाही, अध्यक्ष की अपील बेअसर
शोर-शराबा इतना बढ़ गया कि प्रश्नकाल के दौरान ही सदन की कार्यवाही तीन बार स्थगित करनी पड़ी। विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने विधायकों से सदन की गरिमा बनाए रखने और बैनर-पोस्टर का प्रदर्शन न करने का बार-बार अनुरोध किया, लेकिन उनकी अपील बेअसर रही। विधायक देवेन्द्र यादव ने सत्ता पक्ष पर सामंती प्रथा थोपने का आरोप लगाया, वहीं नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और अजय चंद्राकर के बीच भी सीधी बहस देखने को मिली। हंगामे के चलते सदन की सामान्य कामकाज व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई और बार-बार के व्यवधान ने विधायी कार्यों में बाधा डाली।
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नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में पहुंचे कांग्रेसी विधायक
जब विपक्ष की मांगें नहीं मानी गईं, तो कांग्रेस विधायक “भारत माता की जय” और “जांच एजेंसियों का दुरुपयोग बंद करो” के नारे लगाते हुए सदन के गर्भगृह में घुस गए। विधानसभा के नियमों के अनुसार, सदन की मर्यादा लांघने और गर्भगृह में प्रवेश करने के कारण सभी आंदोलनकारी विपक्षी विधायकों को निलंबित कर दिया गया। इस बड़ी कार्रवाई के बाद भी सदन के बाहर राजनीतिक पारा चढ़ा रहा। सत्ता पक्ष ने इसे विपक्ष की नौटंकी बताया, जबकि कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की आवाज दबाने वाली कार्रवाई करार दिया है।
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