
Korba Pipeline scam: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। कटघोरा नगर पालिका परिषद में विकास कार्यों के नाम पर बड़ी धोखाधड़ी का आरोप लगा है। शिकायत के मुताबिक, जमीन पर एक इंच भी पाइपलाइन नहीं बिछाई गई, लेकिन कागजों में काम पूरा दिखाकर ठेकेदार को 41.21 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। सरकार बदलने के बावजूद भ्रष्टाचार के इस पुराने ढर्रे ने स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
15वें वित्त मद की राशि में बंदरबांट का आरोप
Korba News: भ्रष्टाचार का यह खेल कटघोरा के नवागांव वार्ड क्रमांक 5 में खेला गया है। स्थानीय निवासी अनिल अग्रवाल ने इस पूरे मामले का कच्चा चिट्ठा खोलते हुए कलेक्टर से शिकायत की है। शिकायत के अनुसार, 15वें वित्त मद से नगर पालिका ने 17 जनवरी 2025 को पाइपलाइन विस्तार के लिए निविदा जारी की थी। हैरानी की बात यह है कि जिस काम के लिए लाखों रुपये आवंटित हुए, वह धरातल पर शुरू ही नहीं हुआ था। इसके बावजूद ठेका कंपनी और नगर पालिका के अधिकारियों की मिलीभगत से भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर ली गई।
शिकायत होते ही आनन-फानन में शुरू हुई खुदाई
फर्जी भुगतान का मामला जैसे ही 6 अप्रैल 2026 को मुख्य नगर पालिका अधिकारी के पास पहुंचा, विभाग में हड़कंप मच गया। खुद को फंसता देख अधिकारियों और ठेकेदार ने आनन-फानन में मशीनों को मौके पर उतारा। जिस नवागांव गौरेला मार्ग पर महीनों से सन्नाटा था, वहां अचानक पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल जांच से बचने और भ्रष्टाचार को छिपाने की एक कोशिश है, क्योंकि भुगतान तो काफी समय पहले ही किया जा चुका था।
भौतिक सत्यापन के बिना कैसे जारी हुए लाखों रुपये
इस पूरे घोटाले में सबसे बड़ा सवाल भौतिक सत्यापन को लेकर उठ रहा है। सरकारी नियमों के मुताबिक, किसी भी कार्य का भुगतान तब तक नहीं किया जा सकता जब तक इंजीनियर और संबंधित अधिकारी मौके पर जाकर काम की गुणवत्ता और प्रगति की जांच न कर लें। अब सवाल यह है कि बिना काम कराए इतनी बड़ी रकम किसके इशारे पर जारी की गई। क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने जानबूझकर फाइलों पर दस्तखत किए या फिर इस भ्रष्टाचार में ऊपर से नीचे तक सबकी हिस्सेदारी है।
कलेक्टर कुणाल दुदावत से न्याय की गुहार
शिकायतकर्ता अनिल अग्रवाल ने अब इस मामले की लिखित शिकायत कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत से की है। उन्होंने अपनी शिकायत में साफ तौर पर कहा है कि नगर पालिका परिषद में जनहित के कार्यों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने और सरकारी धन का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों के साथ-साथ ठेकेदार पर भी कड़ी कार्रवाई की मांग की है। कलेक्टर को सौंपे गए दस्तावेजों में टेंडर प्रक्रिया और भुगतान की तारीखों का पूरा विवरण दिया गया है।
जांच हुई तो कई रसूखदारों पर गिर सकती है गाज
कोरबा जिला प्रशासन के लिए यह मामला एक बड़ी चुनौती बन गया है। अगर इस मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच की जाती है, तो नगर पालिका के कई बड़े चेहरों का बेनकाब होना तय माना जा रहा है। फिलहाल, आनन-फानन में शुरू हुए काम ने यह तो साबित कर दिया है कि गड़बड़ी हुई थी। अब देखना यह होगा कि प्रशासन केवल खानापूर्ति करता है या फिर भ्रष्टाचार के इस सिंडिकेट को जड़ से खत्म करने के लिए कोई सख्त कदम उठाता है।



