जंगली भैसें ‘छोटू’ के ल‍िए 17 गांवों के लोग छोड़ेंगे जमीन, वनवासियों का ऐतिहासिक त्याग

गरियाबंद: छत्तीसगढ़ के राजकीय पशु जंगली भैंसे को विलुप्त होने से बचाने के लिए उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है। यहां के कोर एरिया में बसे 17 गांवों के समुदायों ने अपने राजकीय पशु के कुनबे को बढ़ाने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। ग्रामीणों ने तय किया है कि वे जंगली भैंसों के संरक्षण के लिए वन भूमि पर किया गया अपना सालों पुराना कब्जा स्वेच्छा से छोड़ देंगे। मध्य भारत में शुद्ध नस्ल के जंगली भैंसे अब गिनती के ही बचे हैं, ऐसे में वनवासियों की यह पहल इन बेजुबानों के लिए जीवनदान साबित हो सकती है।

ग्राम सभाओं ने लिया संकल्प: अवैध कटाई और जंगलों की आग पर ग्रामीण खुद लगाएंगे लगाम

14 दिसंबर 2025 को टाइगर रिजर्व के अधिकारियों और 17 गांवों के प्रतिनिधियों के बीच एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में पूर्व सरपंचों और स्थानीय प्रमुखों ने जंगली भैंसों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित बनाने पर सहमति जताई। ग्रामीणों ने संकल्प लिया है कि वे न केवल जमीन खाली करेंगे, बल्कि जंगलों में लगने वाली आग को रोकने और अवैध कटाई के खिलाफ वन विभाग का साथ देंगे। ग्राम सभाओं का मानना है कि जब जंगल सुरक्षित और समृद्ध होगा, तभी राजकीय पशु का वंश आगे बढ़ पाएगा।

‘छोटू’ को मिलेगा परिवार: असम से आएंगी तीन मादा भैंसें, रेडियो कॉलर से होगी हाई-टेक निगरानी

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में फिलहाल 26 साल का एक नर जंगली भैंसा है, जिसे स्थानीय लोग प्यार से ‘छोटू’ पुकारते हैं। छोटू के अकेलेपन को दूर करने और नस्ल बढ़ाने के लिए असम से तीन मादा भैंसों को यहां लाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इन मादा भैंसों को पहले 45 दिनों तक क्वारंटीन में रखा जाएगा और फिर विशेषज्ञों की देखरेख में रेडियो कॉलर लगाकर जंगल में छोड़ा जाएगा। इनके लिए विभाग ने घास के मैदान विकसित किए हैं और पीने के पानी के लिए सोलर पंपों से जुड़े तालाब भी तैयार किए हैं ताकि इन्हें किसी तरह की असुविधा न हो।

हाई-टेक सुरक्षा और तत्काल मुआवजा: ऐप से मिलेगी लोकेशन, 30 दिन में होगा फसल नुकसान का भुगतान

तकनीकी मदद। वन्यजीवों और इंसानों के बीच टकराव कम करने के लिए प्रशासन ने ‘एलिफेंट अलर्ट ऐप’ की तर्ज पर जंगली भैंसों की ट्रैकिंग की व्यवस्था की है। इसके साथ ही ‘वन भैंसा मित्र दल’ का गठन किया गया है, जो पैदल गश्त कर इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। ग्रामीणों के हितों का ध्यान रखते हुए सरकार ने फसल या मवेशी के नुकसान पर मुआवजे की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन कर दिया है। अब किसी भी नुकसान की स्थिति में प्रभावित व्यक्ति को 30 दिनों के भीतर सीधे उसके बैंक खाते में भुगतान मिल जाएगा, जिससे ग्रामीणों में सुरक्षा का भाव बढ़ेगा।

संरक्षण की वैश्विक मिसाल: सरकारी जिम्मेदारी से आगे बढ़कर सामाजिक दायित्व बना राजकीय पशु की रक्षा

छत्तीसगढ़ में अब केवल 20 के करीब जंगली भैंसे ही बचे हैं, जिनमें से अधिकांश इंद्रावती नेशनल पार्क में हैं। उदंती-सीतानदी के ग्राम सभा फेडरेशन के अध्यक्ष अर्जुन सिंह नायक और स्थानीय सरपंचों का कहना है कि राजकीय पशु की रक्षा करना अब केवल विभाग का काम नहीं, बल्कि उनका अपना सामाजिक दायित्व है। वनवासियों का यह कदम दुनिया भर के वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए एक अध्ययन का विषय बन रहा है। यह पहल साबित करती है कि अगर स्थानीय समुदाय को विश्वास में लिया जाए, तो इंसान और वन्यजीव बिना किसी टकराव के एक ही इकोसिस्टम का हिस्सा बने रह सकते हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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