
Raipur Visakhapatnam Expressway: भारतमाला परियोजना के तहत तैयार किए जा रहे रायपुर-विशाखापट्नम इकोनॉमिक कॉरिडोर एक्सप्रेस-वे और दुर्ग-आरंग बायपास मार्ग का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अनुसार यह पूरा प्रोजेक्ट मार्च 2027 तक बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद आगामी जून 2027 में लोकार्पण के साथ ही इस छह लेन एक्सप्रेस-वे पर आम गाड़ियों की आवाजाही आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी जाएगी। इस कॉरिडोर के चालू होने से रायपुर से विशाखापट्नम तक की यात्रा का समय घटकर मात्र 5 से 7 घंटे रह जाएगा।

केशकाल में बन रही राज्य की पहली ट्विन-ट्यूब टनल
Raipur Vizag Economic Corridor: कांकेर और कोंडागांव जिले की सीमा पर स्थित केशकाल की मंझिनगढ़ पहाड़ियों को काटकर छत्तीसगढ़ की पहली ट्विन-ट्यूब टनल का निर्माण किया जा रहा है। 2.79 किलोमीटर लंबी इस छह लेन सुरंग के काम में भौगोलिक चुनौतियों के कारण कुछ समय लगा है, लेकिन अब कार्य तेजी से प्रगति पर है। टनल और इंटरचेंज का निर्माण कार्य जनवरी तक पूरा होने की उम्मीद है। यह टनल उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के इको-सेंसिटिव जोन से होकर गुजरती है, इसलिए वन्यजीवों के निर्बाध आवागमन को ध्यान में रखते हुए मंकी कैनोपी, एनिमल अंडरपास और ओवरपास जैसे विशेष इंतजाम भी किए गए हैं।
464 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे 16,491 करोड़
यह विशाल इकोनॉमिक कॉरिडोर कुल 464 किलोमीटर लंबा है, जिसके निर्माण में अनुमानित 16,491 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। यह मार्ग तीन राज्यों से होकर गुजरता है, जिसमें छत्तीसगढ़ में 125 किलोमीटर, ओडिशा में 240 किलोमीटर और आंध्र प्रदेश में 99 किलोमीटर का हिस्सा शामिल है। एनएचएआई रायपुर के क्षेत्रीय अधिकारी आलोक कुमार ने पुष्टि की है कि प्रोजेक्ट का काम तय समयसीमा के भीतर तेजी से पूरा किया जा रहा है, ताकि 2027 के मध्य से जनता को इसका लाभ मिलना शुरू हो सके।

बस्तर के व्यापार और उत्पादों के लिए खुलेगा वैश्विक द्वार
इस एक्सप्रेस-वे का सबसे बड़ा सीधा फायदा बस्तर, कांकेर और कोंडागांव जिलों को मिलने वाला है। इस नए मार्ग से बस्तर सीधे विशाखापट्नम पोर्ट और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक नेटवर्क से जुड़ जाएगा। इससे क्षेत्र के वनोपज, कृषि उत्पाद और स्थानीय इस्पात आसानी से रायपुर, दुर्ग-भिलाई के औद्योगिक केंद्रों और विशाखापट्नम के बंदरगाह तक पहुंच सकेंगे। व्यापारिक सुगमता बढ़ने से पूरे बस्तर संभाग के आर्थिक विकास को एक नया दिशा-निर्देश मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।




