दूसरे के नाम की सिम इस्तेमाल की तो होगी 3 साल की जेल! जानिए आपके नाम कितनी सिम, घर बैठे 2 मिनट में ऐसे लगाएं पता

SIM Card Rules 2026: अगर आप किसी दूसरे व्यक्ति के पहचान पत्र पर सिम चला रहे हैं या फर्जी दस्तावेज देकर नया सिम खरीदने का विचार कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। दूरसंचार विभाग (DoT) ने ऐसे मामलों को लेकर आम जनता के लिए चेतावनी जारी की है। विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी अन्य की पहचान का अनधिकृत उपयोग करके सिम प्राप्त करना और टेलीकॉम नेटवर्क का अनुचित लाभ उठाना कानूनन अपराध है।

डिजिटल सेवाओं और वित्तीय सुरक्षा से जुड़ी है आपकी मोबाइल सिम

DoT Alert on Fake SIM: वर्तमान समय में मोबाइल सिम कार्ड केवल आपसी बातचीत या संदेश भेजने तक सीमित नहीं रह गया है। आज बैंक खाते, यूपीआई भुगतान, आधार वेरिफिकेशन और महत्वपूर्ण ऑनलाइन सेवाएं मोबाइल नंबर से सीधे जुड़ी होती हैं। ऐसे में फर्जी तरीके से हासिल किए गए सिम कार्ड का उपयोग वित्तीय अपराधों और साइबर फ्रॉड के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कड़े कानूनी कदम उठाए हैं।

टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023 के तहत जेल और भारी जुर्माना

Telecommunication Act 2023: फर्जी दस्तावेज या किसी अन्य व्यक्ति की पहचान बदलकर सिम हासिल करने पर टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023 की धारा 42(3)(e) के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को 3 वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा अपराध में सहयोग करने या षड्यंत्र रचने पर भी समान दंड का प्रावधान रखा गया है।

संचार साथी पोर्टल से लगाएं आपके नाम पर दर्ज नंबरों का पता

Fake SIM Penalty: दूरसंचार विभाग ने नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए संचार साथी पोर्टल विकसित किया है। इस आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर कोई भी व्यक्ति यह जांच कर सकता है कि उसके नाम से कुल कितने मोबाइल कनेक्शन चालू हैं। यदि पोर्टल पर कोई ऐसा नंबर दिखाई देता है जिसे आपने खुद नहीं खरीदा है या जो आपके उपयोग में नहीं है, तो आप तुरंत वहीं से उस नंबर की रिपोर्ट कर सकते हैं।

समय-समय पर अपने नाम दर्ज सिम कनेक्शन की जांच करना जरूरी

अपनी पहचान का सुरक्षित रहना हर नागरिक के लिए आवश्यक है। आपके नाम पर जारी किसी भी फर्जी सिम से यदि कोई अवैध गतिविधि होती है, तो प्राथमिक जांच में आप परेशानी में पड़ सकते हैं। इसलिए संचार साथी पोर्टल के माध्यम से नियमित रूप से अपने आईडी की जांच करते रहना चाहिए ताकि किसी भी संभावित धोखाधड़ी या कानूनी उलझन से समय रहते बचा जा सके।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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