
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सड़कों पर आवारा घूमने वाले मवेशियों और उनके कारण होने वाले हादसों को रोकने के लिए प्रशासन ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है. बिलासपुर हाई कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद जिला प्रशासन, नगर निगम और पशु चिकित्सा विभाग ने मिलकर एक बड़ा अभियान शुरू किया है. नए नियमों के मुताबिक, राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों समेत शहर की मुख्य सड़कों पर घूमने वाले लावारिस पशुओं को अब सीधे स्थायी रूप से जब्त कर लिया जाएगा. प्रशासन ने जिले के सभी पशुपालकों, किसानों और डेयरी संचालकों से दोटूक शब्दों में अपील की है कि वे अपने मवेशियों को घरों या निर्धारित बाड़ों में ही बांधकर रखें और उन्हें सड़कों पर लावारिस न छोड़ें.
बार-बार मवेशियों को सड़क पर छोड़ने की आदत पर लगेगी लगाम, मोपका आश्रय केंद्र को किया गया अलर्ट
अब तक की व्यवस्था के अनुसार बिलासपुर नगर निगम की टीम सड़कों से आवारा मवेशियों को पकड़कर मोपका में बने पशु आश्रय केंद्र में भेजती रही है. वहां से नियमों के मुताबिक पशुपालक अर्थदंड देकर अपने मवेशियों को वापस छुड़ा ले जाते थे. हालांकि अधिकारियों ने समीक्षा में पाया कि कई पशुपालक जुर्माना भरने के बाद अपने गाय-बैलों को दोबारा सड़कों पर खुला छोड़ देते हैं. इस लापरवाही की वजह से सड़कों पर लगातार जाम की स्थिति बनी रहती है और रात के समय तेज रफ्तार वाहनों के सामने इन मवेशियों के आने से भयानक सड़क हादसे होते हैं, जिनमें राहगीरों के साथ-साथ मवेशियों की भी जान जाती है.
लावारिस घूमते मिले पशु तो अब नहीं मिलेंगे वापस, सीधे होगी परमानेंट जब्ती की कार्रवाई
इस बार प्रशासन ने पशुपालकों की इसी चालाकी को नाकाम करने के लिए नियमों को बदल दिया है. नए आदेश के तहत यदि कोई भी गाय, बैल या भैंस राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग या किसी भी व्यस्त सड़क पर घूमती हुई पाई गई, तो उसे अस्थायी रूप से बंद करने के बजाय हमेशा के लिए जब्त कर लिया जाएगा. इसका सीधा मतलब यह है कि एक बार पशु निगम की टीम की गिरफ्त में आ गया, तो उसके मालिक को उसे दोबारा वापस पाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं होगा. इस सख्त कदम का मकसद पशुपालकों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराना है.
जब्त गाय-बैलों को जरूरतमंद किसानों और बैगा-बिरहोर परिवारों को सौंपेगा पशुपालन विभाग
सड़कों से स्थायी रूप से जब्त किए गए इन मवेशियों के बेहतर रखरखाव और संरक्षण के लिए भी प्रशासन ने एक ठोस कार्ययोजना तैयार की है. पशुपालन विभाग के माध्यम से इन जब्त किए गए सांडों और बैलों को बैल-जोड़ी की इकाई बनाकर बैगा, बिरहोर जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों और ग्रामीण क्षेत्रों के जरूरतमंद गरीब किसानों को खेती-किसानी के लिए मुफ्त में सौंप दिया जाएगा. इसी तरह जब्त की गई दुधारू और अन्य गायों को भी गौ-इकाई के रूप में जरूरतमंद परिवारों को स्थायी पालन-पोषण के लिए वितरित किया जाएगा ताकि वे उनका सही इस्तेमाल कर सकें.
गौशालाओं और सरकारी गौठानों में भी किया जाएगा विस्थापन, नहीं सुनी जाएगी कोई सिफारिश
जिन मवेशियों को स्थानीय किसानों या जरूरतमंद परिवारों को नहीं सौंपा जा सकेगा, उनके लिए भी सुरक्षित ठिकानों का इंतजाम किया गया है. प्रशासन ऐसे बचे हुए सभी लावारिस पशुओं को जिले की पंजीकृत गौशालाओं और सरकारी गौठानों में स्थायी रूप से शिफ्ट कर देगा. इसके लिए नगर निगम की टीम ने शहर के आसपास के सभी प्रमुख गौठानों में अतिरिक्त व्यवस्थाएं शुरू कर दी हैं. अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि मवेशी पकड़े जाने के बाद किसी भी राजनेता या रसूखदार व्यक्ति की सिफारिश को न माना जाए और परमानेंट जब्ती की प्रक्रिया को बिना किसी भेदभाव के पूरा किया जाए.
हाई कोर्ट के आदेश के तहत लागू की जा रही व्यवस्था, जुर्माने या दावे-आपत्ति के सारे रास्ते बंद
जिला प्रशासन ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि इस नई व्यवस्था के तहत की जाने वाली किसी भी कानूनी कार्रवाई के खिलाफ किसी भी तरह की दावा-आपत्ति या कोर्ट केस स्वीकार नहीं किया जाएगा. चूंकि यह पूरा अभियान सीधे माननीय मुख्य न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानकर चलाया जा रहा है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर ढील नहीं दी जाएगी. प्रशासन ने सभी नागरिकों और सामाजिक संगठनों से इस सुरक्षा अभियान में सहयोग करने और अपने आस-पास आवारा घूम रहे मवेशियों की जानकारी तुरंत निगम के कंट्रोल रूम को देने की बात कही है.



