
छत्तीसगढ़ की सियासत में इन दिनों बाहरी विरोध से ज्यादा अपनों की बेबाकी सरकार की सिरदर्दी बढ़ा रही है। प्रदेश के कद्दावर भाजपा नेता और पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सीधे दिल्ली में दस्तक दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) में चल रही धांधली की शिकायत की है। ननकीराम कंवर अपनी कड़क छवि के लिए जाने जाते हैं और उनके इस कदम ने प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव का विभाग निशाने पर
ननकीराम कंवर के निशाने पर इस बार लोक निर्माण विभाग है जिसकी जिम्मेदारी खुद उपमुख्यमंत्री अरुण साव संभाल रहे हैं। कंवर ने विभाग के प्रमुख अभियंता पर अपने चहेते ठेकेदारों को उपकृत करने और नियमों को ताक पर रखकर काम करने के आरोप लगाए हैं। पत्र में दावा किया गया है कि पुराने आपराधिक मामले दर्ज होने के बावजूद रसूखदार अधिकारियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई (CBI) से कराने की मांग की है।
गुणवत्ता की जांच खुद करने की इच्छा
वरिष्ठ नेता ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की परख उनकी मौजूदगी में कराई जाए। उनका कहना है कि सड़कों और भवनों के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग हो रहा है जिससे सरकारी धन की बर्बादी हो रही है। कंवर ने साफ किया कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे चाहे इसके लिए उन्हें अपनी ही सरकार के तंत्र से क्यों न लड़ना पड़े। यह मांग सरकार की कार्यप्रणाली पर सीधे तौर पर सवाल खड़े करती है।
सरकार को आईना दिखा रहे अपने ही दिग्गज
यह कोई पहला मौका नहीं है जब भाजपा के वरिष्ठ नेता अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़े नजर आ रहे हैं। इससे पहले सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी स्काउट-गाइड जंबूरी कार्यक्रम में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उसे रद्द करने की बात कही थी। वहीं राजधानी रायपुर के विधायक भी समय-समय पर प्रशासनिक ढिलाई और कानून व्यवस्था को लेकर चिंता जताते रहे हैं। भाजपा के भीतर उठने वाले ये स्वर बता रहे हैं कि आंतरिक स्तर पर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
कांग्रेस को मिला हमला करने का मौका
भाजपा के अंदरूनी घमासान ने विपक्षी दल कांग्रेस को संजीवनी दे दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस मामले पर चुटकी लेते हुए कहा कि अब तो भाजपा के सांसद और विधायक ही सरकार की पोल खोल रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि राजिम कुंभ से लेकर शिक्षक भर्ती तक हर जगह अनियमितताएं हो रही हैं और सरकार के अपने नेताओं की शिकायतें इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं। विपक्ष अब इस मुद्दे को लेकर सड़क से सदन तक सरकार को घेरने की तैयारी में है।
जीरो टॉलरेंस की नीति पर उठे सवाल
ननकीराम कंवर वही नेता हैं जिन्होंने पिछली सरकार के दौरान सीजीपीएससी (CGPSC) घोटाले को अदालत तक पहुंचाया था जिसके कारण कई गिरफ्तारियां हुईं। अब अपनी ही सरकार में उनका यह बागी रुख बताता है कि वे ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को लेकर गंभीर हैं। दिल्ली भेजे गए इस शिकायती पत्र पर केंद्र का क्या रुख रहता है और राज्य सरकार अपने नाराज दिग्गजों को कैसे मनाती है यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।



