सरायपाली को जिला बनाने की मांग फिर सुर्खियों में, वर्ष 2015 से लगातार उठ रही मांग

सरायपाली को जिला बनाने की मांग एक बार फिर से प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है। यह कोई नई मांग नहीं है, बल्कि पिछले एक दशक से समय-समय पर इस मुद्दे को उठाया जाता रहा है।

सबसे पहले वर्ष 2015 में तत्कालीन ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमृत पटेल के नेतृत्व में एक सर्वदलीय मंच ने इस मांग को गंभीरता से उठाया था। उस समय भाजपा की सरकार थी और डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री थे। अमृत पटेल ने सरायपाली को जिला घोषित किए जाने को लेकर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया था और राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा था।

उनका तर्क था कि सरायपाली का भौगोलिक क्षेत्रफल, जनसंख्या, प्रशासनिक आवश्यकताएं और जनभावनाएं सभी जिला बनने के मानकों को पूरा करती हैं। हालांकि, उस समय की सरकार ने इस मांग पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

सत्ता परिवर्तन के साथ बदला रुख

भाजपा जब विपक्ष में आई, तो 2021 में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में उसी पार्टी ने सरायपाली को जिला बनाने की मांग को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपा।

अब वर्ष 2025 में फिर से भाजपा सत्ता में है और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार चल रही है। इसी बीच कांग्रेस विधायक चातुरी नंद ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए सरायपाली को जिला बनाए जाने की पुरजोर मांग की है।

जनता और प्रतिनिधियों का समर्थन

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों का मानना है कि सरायपाली को जिला बनाने से क्षेत्र में प्रशासनिक कामकाज अधिक सुचारु होगा, विकास योजनाओं में तेजी आएगी और जनता को राजधानी या अन्य जिलों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब सभी प्रमुख राजनीतिक दल इस मुद्दे पर सहमत हैं, तो अब राज्य सरकार को इसे लेकर निर्णायक कदम उठाना चाहिए।

ऐतिहासिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से उपयुक्त

स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि सरायपाली की ऐतिहासिक, भौगोलिक और जनसंख्या से जुड़ी विशेषताएं इसे जिला बनाए जाने के लिए पूरी तरह उपयुक्त बनाती हैं। यदि सरकार इस दिशा में कदम उठाती है, तो यह क्षेत्र आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से और अधिक सक्षम बन सकेगा।

अब सभी की नजरें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर टिकी हैं — क्या वह इस वर्षों पुरानी मांग को हकीकत में बदलेंगे?

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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