
छत्तीसगढ़ में अपनी जमीन का डायवर्सन (व्यपवर्तन) कराने के लिए अब आम जनता को तहसील या एसडीएम दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। राजस्व विभाग इस पूरी प्रक्रिया को हाईटेक करने की तैयारी में है। इसके लिए एक खास मोबाइल ऐप और पोर्टल तैयार किया गया है जिसका वर्तमान में फाइनल ट्रायल चल रहा है। इस डिजिटल पहल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि लोग घर बैठे ही आवेदन कर सकेंगे और भ्रष्टाचार की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
डेढ़ महीने से अटके काम को मिलेगी रफ्तार
डायवर्सन की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के लिए सरकार ने 13 दिसंबर को अधिसूचना जारी की थी। तकनीकी रूप से पोर्टल पूरी तरह अपडेट न होने के कारण पिछले डेढ़ महीने से डायवर्सन से जुड़े काम काफी हद तक ठप पड़े थे। अब राजस्व विभाग के आला अधिकारियों ने तमाम तकनीकी खामियों को दूर करने के निर्देश दिए हैं। विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले समय में डायवर्सन का कोई भी काम मैनुअल तरीके से न होकर केवल ऑनलाइन मोड में ही संपन्न हो।
15 दिन की समय सीमा और ऑटो-अप्रूवल
नया सिस्टम पूरी तरह पारदर्शिता पर आधारित है। इसमें आवेदन करने वाले के लिए एक समय सीमा तय की गई है। यदि संबंधित अधिकारी तय वक्त के भीतर फाइल को आगे नहीं बढ़ाते हैं तो सॉफ्टवेयर खुद ही उसे अप्रूव कर देगा। विभाग ने इस प्रणाली को ‘ऑटो-अप्रूवल’ का नाम दिया है। इससे आवेदनों को बेवजह लटकाने की परंपरा खत्म होगी और लोगों को निर्धारित समय के भीतर डायवर्सन का आदेश मिल जाएगा।
ऐसे काम करेगा नया ऑनलाइन सिस्टम
प्रक्रिया को बेहद सरल और यूजर फ्रेंडली बनाया गया है ताकि कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी इसका उपयोग कर सके। नए सिस्टम के मुख्य चरण इस प्रकार हैं:
- ऑनलाइन आवेदन: आवेदक को आधिकारिक पोर्टल पर अपनी जमीन की जानकारी के साथ आवेदन करना होगा।
- डिजिटल पेमेंट: आवेदन के समय ही जमीन के क्षेत्रफल के हिसाब से भू-राजस्व और प्रीमियम फीस का ऑनलाइन भुगतान करना होगा।
- अधिकारी को फॉरवर्ड: पेमेंट सफल होते ही आवेदन सीधे संबंधित एसडीएम (SDM) की आईडी पर पहुंच जाएगा।
- समय सीमा: एसडीएम को इस आवेदन पर 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट या आदेश जारी करना होगा।
16वें दिन अपने आप जारी होगा डिजिटल आदेश
भ्रष्टाचार और फाइलों को दबाने वाली प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के लिए सिस्टम में एक खास फीचर जोड़ा गया है। अगर 15 दिनों तक एसडीएम उस आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं करते हैं तो 16वें दिन कंप्यूटर ऑटोमेटिक तरीके से आदेश जारी कर देगा। यह कंप्यूटर जनरेटेड आदेश पूरी तरह वैध और कानूनी रूप से मान्य होगा। इससे अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी और जनता को बेवजह की मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति मिलेगी।
ट्रायल के अंतिम चरण में राजस्व विभाग
राजस्व विभाग के सूत्रों के अनुसार नया ऐप और वेबसाइट पूरी तरह विकसित हो चुके हैं। फिलहाल तकनीकी टीम अंतिम चरण का ट्रायल कर रही है ताकि लोड बढ़ने पर सर्वर धीमा न पड़े। अधिकारियों को भरोसा है कि जल्द ही इसे आम जनता के लिए लाइव कर दिया जाएगा। इस बदलाव के बाद छत्तीसगढ़ में जमीन की खरीद-बिक्री और उसके उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया में एक क्रांतिकारी सुधार देखने को मिलेगा।



