
छत्तीसगढ़ में हर घर नल से पानी पहुंचाने वाली जल जीवन मिशन योजना में गंभीर अनियमितता सामने आई है। बिलासपुर जिले में ठेका फर्मों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे 113 करोड़ रुपये से अधिक के काम हासिल कर लिए। हैरानी की बात यह रही कि काम पूरा हुए बिना ही भुगतान भी कर दिया गया, जबकि कई गांवों में काम अब तक अधूरा है।
फर्जी दस्तावेज से मिला ठेका, महाराष्ट्र का प्रमाण पत्र निकला गलत
जांच में सामने आया कि मेसर्स विजय वी. साळुंखे नाम की कंपनी ने काम पाने के लिए महाराष्ट्र नगर पालिका का अनुभव प्रमाण पत्र लगाया था। सत्यापन में यह दस्तावेज फर्जी पाया गया। इस आधार पर कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इसी फर्जी प्रमाण पत्र का इस्तेमाल जॉइंट वेंचर में शामिल अन्य छह फर्मों ने भी किया, जिनके जरिए करोड़ों रुपये के काम लिए गए।
199 गांवों के काम, ज्यादातर अधूरे
बिलासपुर जिले के 199 गांवों में कुल 211 काम स्वीकृत हुए थे, जिनकी लागत करीब 1,250 करोड़ रुपये बताई गई। इनमें से सिर्फ 92 काम पूरे हुए हैं, जबकि 119 काम या तो अधूरे हैं या शुरू ही नहीं हुए। इसके बावजूद 113 करोड़ 15 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान ठेकेदारों को कर दिया गया। अब सिर्फ करीब 3 करोड़ रुपये का भुगतान बचा है।
शिकायत के बाद जांच, अधिकारियों पर नहीं हुई कार्रवाई
इस पूरे मामले का खुलासा बिल्हा विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक की शिकायत के बाद हुआ। जांच शुरू होने से पहले ही जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने सातों फर्मों को भुगतान कर दिया। जांच में सिर्फ एक फर्म को ब्लैकलिस्ट किया गया, जबकि बाकी फर्मों और भुगतान से जुड़े अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विभागीय जांच के दायरे में भी अधिकारियों को शामिल नहीं किया गया।
सरकार का पक्ष, आगे होगी कार्रवाई का दावा
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि जल जीवन मिशन की एपेक्स कमेटी ने सभी संबंधित फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने और टेंडर निरस्त करने का फैसला लिया है। फर्जी दस्तावेज के मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और पुलिस जांच कर रही है। जॉइंट वेंचर में शामिल अन्य फर्मों ने भी खुद को ठगा हुआ बताया है। सरकार का कहना है कि जांच में जिनकी भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी और अधूरे काम जल्द पूरे कराए जाएंगे।
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