
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में डीएड (D.El.Ed.) प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का आंदोलन अब उग्र होता जा रहा है। नवा रायपुर के तूता में जारी आमरण अनशन के 25वें दिन प्रदर्शनकारियों ने सामूहिक रूप से अपना मुंडन कराया। कड़कड़ाती ठंड और खुले आसमान के नीचे बैठे ये युवा सहायक शिक्षक भर्ती 2023 में अपनी नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। मुंडन कराकर अभ्यर्थियों ने सरकार को यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे अपनी जायज मांगों के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
कोर्ट के आदेश के बाद भी अटकी नियुक्ति
आंदोलनकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट बिलासपुर ने उनके पक्ष में स्पष्ट आदेश जारी किए हैं। 2 अप्रैल 2024 और फिर 26 सितंबर 2025 को अदालत ने भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद करीब 2300 पद अब भी खाली पड़े हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार अदालती आदेशों की अवहेलना कर रही है, जिससे हजारों योग्य युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। वे पिछले 24 दिसंबर से लगातार अनशन पर बैठे हैं लेकिन शासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
विधानसभा में जवाब से बढ़ी मायूसी
अभ्यर्थियों की निराशा उस वक्त गुस्से में बदल गई जब विधानसभा सत्र के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा हुई। विधायक रिकेश सेन के सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री ने कहा कि शेष पदों पर नियुक्ति के लिए कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई जा सकती। इस बयान के बाद अभ्यर्थियों को लगा कि सरकार इस भर्ती को लेकर गंभीर नहीं है। उनका कहना है कि जब उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय बार-बार निर्देश दे चुके हैं, तब समय-सीमा बताने से इनकार करना लोकतंत्र और न्यायपालिका का अपमान है।
बीमार अभ्यर्थियों को नहीं मिली एंबुलेंस
अनशन के 25वें दिन आधा दर्जन प्रदर्शनकारियों की तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। हैरानी की बात यह रही कि समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंचने के कारण बीमार अभ्यर्थियों को ‘छोटा हाथी’ (मालवाहक वाहन) में लिटाकर अभनपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाना पड़ा। अब तक कुल 13 अभ्यर्थियों की सेहत खराब हो चुकी है, जिनमें कांकेर, जांजगीर, बलौदाबाजार और राजनांदगांव समेत कई जिलों के युवा शामिल हैं। ठंड और भूख के कारण कई लड़कियां भी अस्पताल में भर्ती कराई गई हैं।
बीएड बनाम डीएड का पुराना विवाद
इस विवाद की जड़ 2023 की शिक्षक भर्ती है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 2621 बीएड डिग्रीधारियों को सहायक शिक्षक पद से हटाया जाना था। अभ्यर्थियों का दावा है कि बर्खास्त बीएड वालों को तो विज्ञान प्रयोगशाला में समायोजित कर दिया गया, लेकिन उनकी जगह रिक्त हुए पदों पर डीएड योग्यताधारियों को अब तक मौका नहीं दिया गया। इसी भेदभाव के खिलाफ यह पूरा आंदोलन खड़ा हुआ है। अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया है कि उनका यह प्रदर्शन पूरी तरह से गैर-राजनीतिक है और केवल हक की लड़ाई है।
नियुक्ति मिलने तक जारी रहेगा अनशन
कड़ाके की ठंड और गिरते स्वास्थ्य के बावजूद अभ्यर्थियों ने पीछे हटने से साफ इनकार कर दिया है। उनकी एक ही मांग है कि सहायक शिक्षक भर्ती के शेष 2300 पदों पर तत्काल नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं। उन्होंने सरकार से अपील की है कि वह संवेदनशीलता दिखाते हुए इस मानवीय संकट का समाधान करे। युवाओं का कहना है कि जब तक नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू नहीं होती, उनका यह शांतिपूर्ण और अहिंसक आमरण अनशन इसी तरह चलता रहेगा।



