
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी को लेकर जारी घमासान अब आर-पार की लड़ाई में बदल गया है। एक तरफ शिक्षक संगठन इस व्यवस्था का पुरजोर विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शिक्षा विभाग ने इसे लागू करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। बस्तर जिला शिक्षा अधिकारी ने एक बेहद सख्त आदेश जारी किया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि यदि शिक्षक विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) ऐप पर अपना पंजीयन नहीं कराते हैं, तो इसका खामियाजा खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को भुगतना होगा। विभाग के इस फैसले से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
पंजीयन में देरी पर रुकेगा खंड शिक्षा अधिकारियों का वेतन
बस्तर जिले से जारी निर्देश में कहा गया है कि VSK ऐप में शिक्षकों के पंजीयन की गति बहुत धीमी है। राज्य स्तर से मिली डेडलाइन के अनुसार यह काम केवल दो दिनों के भीतर पूरा किया जाना था। जिला शिक्षा अधिकारी ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में शत-प्रतिशत पंजीयन नहीं हुआ, तो जिले के सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों का जनवरी 2026 माह का वेतन रोक दिया जाएगा। इस आदेश ने अधिकारियों को सीधे तौर पर जवाबदेह बना दिया है, जिससे अब वे शिक्षकों पर दबाव बनाने को मजबूर हैं।
तकनीकी खामियां और नेटवर्क बना बड़ी बाधा
शिक्षा विभाग जहां डिजिटल अटेंडेंस को पारदर्शिता के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं जमीनी हकीकत काफी अलग है। शिक्षक संगठनों का तर्क है कि बस्तर जैसे सुदूर और पहाड़ी इलाकों में मोबाइल नेटवर्क की स्थिति बेहद खराब है। कई स्कूल ऐसे क्षेत्रों में हैं जहां इंटरनेट सिग्नल मिलना नामुमकिन है। ऐसी स्थिति में ऐप आधारित हाजिरी को अनिवार्य करना शिक्षकों के लिए मानसिक प्रताड़ना जैसा है। शिक्षकों का कहना है कि तकनीकी बुनियादी ढांचे को सुधारे बिना केवल सख्ती दिखाने से व्यवस्था सफल नहीं होगी।
पारदर्शिता और गुणवत्ता का हवाला दे रहा विभाग
शिक्षा विभाग का मानना है कि VSK ऐप केवल हाजिरी लगाने का साधन नहीं है, बल्कि इसके जरिए स्कूलों की शैक्षणिक गतिविधियों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकेगी। विभाग का तर्क है कि इस व्यवस्था से शिक्षकों की जवाबदेही तय होगी और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा। डिजिटल रिकॉर्ड होने से फाइलों के हेरफेर और बिना सूचना गायब रहने वाले शिक्षकों पर अंकुश लगाया जा सकेगा। इसी वजह से शासन इस योजना को किसी भी हाल में पीछे खींचने के मूड में नहीं दिख रहा है।
शिक्षक संगठनों ने खोला मोर्चा, जताई नाराजगी
ऑनलाइन अटेंडेंस के खिलाफ प्रदेश भर के शिक्षक एकजुट हो रहे हैं। संगठनों ने अपनी शिकायतें मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और लोक शिक्षण संचालनालय तक पहुंचा दी हैं। हाल ही में एक शिक्षिका को इस मामले में मिले नोटिस ने आग में घी डालने का काम किया है। शिक्षकों का आरोप है कि विभाग उन्हें अपराधी की तरह देख रहा है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि वेतन रोकने या दंडात्मक कार्रवाई जैसी धमकियां बंद नहीं हुईं, तो वे सामूहिक रूप से काम बंद कर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
बस्तर के दुर्गम इलाकों में बड़ी चुनौती
जानकारों का मानना है कि बस्तर की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इस आदेश को लागू करना विभाग के लिए लोहे के चने चबाने जैसा होगा। कई शिक्षक पैदल चलकर या नदी-नाले पार करके स्कूलों तक पहुंचते हैं। वहां स्मार्टफोन चार्ज करने तक की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में ऐप से हाजिरी न होने पर वेतन रोकना न्यायसंगत नहीं लगता। अब देखना यह होगा कि 23 फरवरी की अगली समीक्षा बैठक तक विभाग इस विरोध को शांत कर पाता है या शिक्षकों का यह असंतोष किसी बड़े आंदोलन की शक्ल ले लेता है।



